राजस्थान के कोटा जिले में पत्नी और बेटे की कुल्हाड़ी से निर्मम हत्या करने के करीब 5 साल पुराने मामले में एडीजे कोर्ट दो ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला सुना दिया। कोर्ट ने आरोपी पति को फांसी की सजा से दंडित किया है। साथ ही आरोपी पर 50 हजार रूपये का जुर्माना भी लगाया है। फैसले के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा है कि 'रक्षक ही भक्षक बन जाए तो कौन बचाएगा'? ऐसे दोषी को मृत्युदंड से कम दंड नहीं होना चाहिए। यह सनसनीखेज वारदात शहर के रामपुरा कोतवाली इलाके में साल 2021 में हुई थी।
अभियोजक भारत सिंह आसावत ने बताया कि यह घटना जून 2021 में रामपुरा कोतवाली थाना इलाके के भाटापाड़ा में हुई थी। जहां पर 1 जून को आरोपी पिंटू अपनी पत्नी सीमा को मायके से लेकर आया था। इसी दौरान शाम को पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। तभी पिंटू ने गुस्से में आकर सीमा पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। वारदात में सीमा की गर्दन पेट और पैर सहित कई जगहों पर धारदार हथियार के निशान हो गए। इस दौरान 6 माह का बच्चा भी इस हमले में घायल हो गया। दोनों की वारदात में मौत हो गई थी। तभी से मामला कोर्ट में विचाराधीन था।
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पत्नी की हत्या कर थाने पहुंचा था आरोपी
वहीं वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मृतका के मृतक शरीर को घसीट कर घर से बाहर लाया था। यह पूरी घटना तिराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हो गई थी। इस दौरान आरोपी के हाथ में वारदात में इस्तेमाल की गई कुल्हाड़ी भी थी। इस पूरी वारदात में कोर्ट में आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया गया और 23 गवाहों के बयान करवाए गए। वारदात के बाद आरोपी थाने पहुंचा था और कहा था कि मैने अपनी पत्नी को मार दिया। कोर्ट ने रेयर ऑफ टू रेयरस्टेट मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई है।
फैसले में कोर्ट ने कहीं तीन अहम बातें
अभियोजक भारत सिंह आसावत ने बताया की कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा है कि हम एक हाइपोथेटिकल स्थिति का भी उल्लेख करना चाहेंगे। जब किसी व्यक्ति के द्वारा कोई जानवर मसलन कुत्ता आदि का लिया जाता है तो वह भी कुछ समय के बाद परिवार का एक सदस्य हो जाता है और व्यक्ति उसे कोई नुकसान भी नहीं पहुंचा सकता। इस तरह आरोपी पिंटू एक पति और पिता था और लगातार पत्नी और बच्चे के संपर्क में था।
इस तरह की जघन्य हत्या करने से साफ पता लगता है कि दोषी निर्दय और राक्षसी प्रकृति का है। जिसमें मानवता नाम की कोई जगह नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि अगर हम दोषी को मृत्यु दंड से कम कोई दंड देते हैं तो उसे न केवल न्याय के उद्देश्य भी विफल होंगे। समाज में भी इस प्रकार की मनोवृत्ति रखने वाले अपराधिक कृत्य करने वाले अपराधियों को बढ़ावा मिलेगा और आमजन में भी ऐसे लोगों का डर बना रहेगा।
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