सीकर में आज आशा सहयोगिनियों ने कलेक्ट्रेट के गेट पर हल्ला बोल किया। महिला कर्मचारियों ने 7 सूत्री मांगों को ने जोरदार से नारेबाजी की। राजस्थान आशा सहयोगिनी कर्मचारी संघ के बैनर तले सैकड़ों आशा सहयोगिनी कर्मचारी डाक बंगले से रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंची और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर ADM रतन कुमार स्वामी को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारी आशा सहयोगिनियों ने परमानेंट करने, सैलरी फिक्स करने, संविदा नियम 2022 में समावेशन, सोशल सिक्योरिटी और पेंडिंग मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। आशा सहयोगिनी महिलाओं ने चेतावनी दी कि संगठन की मांगों पर जल्द पॉजिटिव डिसीजन नहीं हुआ तो कार्य बहिष्कार किया जाएगा व आगामी पंचायत-निकाय चुनाव में सरकार के खिलाफ रणनीति बनाई जाएगी। प्रदेशाध्यक्ष अलका किनियां और आशा सहयोगिनी चंदा कुमारी ने बताया कि प्रदेशभर में 7 सूत्री मांगों को लेकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने आशा सहयोगिनियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, तब तक न्यूनतम 18 हजार रुपये मानदेय तय करने, सेवानिवृत्ति लाभ, अनुकंपा नियुक्ति और पदोन्नति में वरीयता जैसी मांगों को प्रमुख बताया। इसके अलावा मानदेय का समय पर भुगतान, कार्यों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने, अत्यधिक ऑनलाइन कार्यों में राहत देने तथा स्मार्टफोन जैसे तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की भी मांग रखी गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से मांगें लंबित रहने से आशा सहयोगिनियों में नाराजगी है और जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन तेज किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान जिलेभर से बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनी महिलाएं मौजूद रहीं। ये हैं 7 सूत्री मांगें:-
1.संविदा नियम 2022 का समावेशन करते हुए आशा सहयोगिनी महिलाओं सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
2.सैलरी फिक्स करते हुए हर आशा सहयोगिनी को मिनीमम सैलरी 18,000/- प्रतिमाह और एनुअल इंक्रीमेंट दिया जाए।
3.परमानेंट बेनिफिट, अनुकम्पा नियुक्ति, PF, पेंशन, हैल्थ समेत सहित सभी सोशल सिक्योरिटी योजनाओं का लाभ दिया जाए। रिटायरमेंट पर 5 लाख की सम्मान राशि दी जाए।
4.प्रमोशन, रिक्रूटमेंट में प्रायोरिटी और टाइम पर सैलेरी दी जाए। योग्य आशा वर्कर्स को ANM व सुपरवाइजर पदों की भर्ती में वरीयता दी जाए। योग्यता व एक्सपीरियेंस के आधार पर प्रमोशन/सैलरी इंक्रीमेंट दी जाए।
5. आशा व ANM के कार्यों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाए।
6. ऑनलाइन कामों, मॉनिटरिंग व कैडर सुदृढ़ीकरण किया जाए। ऑनलाइन कामों के लिए स्मार्ट फोन उपलब्ध कराए जाएं।
7. आशा कार्यों की मॉनिटरिंग एक स्तर पर करवाई जाए। विभिन्न अधिकारियों को अलग-अलग रिपोर्ट देने का मानसिक दवाब ना दिया जाए।
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