पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना में सरकार ने 12 नई सिंचाई परियोजनाओं को भी शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को डीपीआर में शामिल करने के लिए राज्य सरकार के जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत ने केंद्र सरकार से बात की है। रावत ने बताया कि इन नई परियोजनाओं को लिंक परियोजना में शामिल करने से लगभग 70 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
रावत ने बताया कि राजस्थान से संबंधित परियोजना घटकों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय जल आयोग के ई-पीएएमएस पोर्टल पर मूल्यांकन के लिए अपलोड कर दी गई है। तकनीकी एवं लागत मूल्यांकन अंतिम चरण में हैं। इसके बाद परियोजना को पीआईबी एवं मंत्रिमंडल की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन अतिरिक्त कार्यों को डीपीआर में शामिल कर राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण, केन्द्रीय जल आयोग एवं मध्य प्रदेश सरकार को जानकारी भेजी जा चुकी हैं।
पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को लाभ
रावत ने कहा कि परियोजना से पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को लाभ मिलेगा। इस परियोजना से राज्य को कुल 4102.60 एमसीएम जल उपलब्ध हो सकेगा। इसमें से कुल 4 लाख 3 हजार हेक्टेयर में सिंचाई के लिए जल उपलब्ध होगा। इनमें 2 लाख 21 हजार हेक्टेयर नवीन सिंचाई क्षेत्र, 1 लाख 52 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का पुनर्स्थापन एवं 30 हजार हेक्टेयर रिसाईकल वाटर से सिंचाई हो सकेगी।
रावत ने कहा कि उन्होंने इंटर लिंकिंग ऑफ रिवर योजना के अंतर्गत केन्द्र सरकार द्वारा संशोधित पीकेसी लिंक परियोजना के सभी घटकों को सामूहिक घटक मानते हुए केन-बेतवा लिंक परियोजना के तर्ज पर 90 प्रतिशत (केन्द्र) और 10 प्रतिशत (राज्य) वित्त पोषित किए जाने के लिए भी केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जल सुरक्षा, कृषि विकास और क्षेत्रीय संतुलन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
चम्बल से बनास नदी तक लिंक योजना के लिए 7900 करोड़ की डीपीआर भेजी
रावत ने कहा कि उन्होंने जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल से से कोसी मिचि नदी जोड़ो परियोजना के आधार पर राणा प्रताप सागर चम्बल से बनास नदी तक लिंक योजना बनाए जाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में चम्बल नदी में बाढ़ की स्थिति पर केन्द्रीय जल आयोग द्वारा अध्ययन कर रिपोर्ट बनाई गई, जिसमें चम्बल नदी के बाढ़ जल को फीडर या अन्य माध्यम से पास किए जाने की अभिशंषा की गई थी। इस अभिशंषा के अनुसार राजस्थान सरकार द्वारा डीपीआर (7900 करोड़ रुपए) तैयार की केन्द्रीय जल आयोग को भेज दी गई है। रावत ने कहा कि इस लिंक योजना से 8 जिलों में बाढ़ से राहत मिल सकेगी।
जापानी एवं कोरियाई औद्योगिक क्षेत्र भी डीपीआर में शामिल करने की मांग
जल संसाधन मंत्री ने बताया कि दिल्ली-मुम्बई कॉरिडोर के अंतर्गत कोटपूतली-बहरोड़ जिले के जापानी एवं कोरियाई औद्योगिक क्षेत्र की पेयजल एवं औद्योगिक जल की दीर्घकालीन मांग को पूरा किया जाएगा। इसके लिए राजगढ़ एवं नीमराना तहसील में क्रमशः लगभग 150 एवं 13.5 एमसीएम क्षमता वाले अतिरिक्त कृत्रिम जलाशयों के निर्माण कार्य डीपीआर में प्रस्तावित किए गए हैं। उन्होंने जल शक्ति मंत्री ने इन कार्यों को भी डीपीआर में शामिल करने की मांग की है।
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