कोटा में पुलिस को एक भैंस के असली मालिक की पहचान करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। दरअसल, एक भैंस और उसके बच्चे को लेकर दो दावेदार आपस में झगड़ते हुए कुन्हाड़ी थाने पहुंच गए। दोनों ही भैंस को अपना बता रहे थे, जिसके चलते पुलिस भी दुविधा में पड़ गई। करीब
मामला शनिवार दोपहर कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र का है। कुन्हाड़ी थाना अधिकारी कौशल्या गालव ने बताया- दोनों पक्षों के विवाद के बाद भैंस को गाड़ी में लोड कर थाने लाया गया। असली मालिक का पता लगाने के लिए भैंस का मेडिकल कराना पड़ा।
एक पक्ष बालिता रोड निवासी इंद्रजीत केवट ने भैंस की उम्र 7 साल बताई, जबकि दूसरे पक्ष रामलाल मेघवाल ने उसकी उम्र साढ़े 4 साल बताई। पशु चिकित्सकों द्वारा किए गए मेडिकल में भैंस की उम्र 4 से 5 साल के बीच पाई गई।
पुलिस को भैंस के असली मालिक की पहचान कराने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
अब 3 पॉइंट में समझिए पूरा मामला
1. गुमशुदा भैंस के 2 दावेदार आमने-सामने हेड कॉन्स्टेबल नरेंद्र सिंह ने बताया- इंद्रजीत केवट की भैंस करीब 4 महीने पहले गुम हो गई थी, जिसकी उसने तलाश भी की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। दो दिन पहले एक भैंस उसके बाड़े में आ गई, जिसे उसने अपनी गुमशुदा भैंस मानते हुए बांध लिया। इसी दौरान रामलाल मेघवाल ने दावा किया कि उसकी भैंस दो दिन पहले गुम हुई थी और वही भैंस इंद्रजीत के बाड़े में बंधी मिली, जिसे वह वहां से ले आया।
2. मंदिर में कसम, पशु चिकित्सालय में मेडिकल, फिर भी नहीं सुलझी गुत्थी इसके बाद इंद्रजीत केवट ने इस पर अपना दावा करते हुए एसपी कार्यालय में परिवाद दिया। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की। दोनों पक्षों ने मंदिर में खड़े होकर भी भैंस अपनी होने की कसम खाई। भैंस और उसके बच्चे को मौखापाड़ा स्थित बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय ले जाकर मेडिकल कराया गया।
3. पुलिस ने सौंपी भैंस मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद भी एक पक्ष संतुष्ट नहीं हुआ। दोनों दावेदारों ने पशु चिकित्सकों को भैंस के साथ अपनी-अपनी फोटो भी दिखाई, लेकिन उससे भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। फिलहाल पुलिस ने भैंस रामलाल मेघवाल को सौंप दी है और इंद्रजीत केवट से कहा गया है कि यदि उसके पास कोई ठोस सबूत हों तो वह थाने में पेश करे।
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