पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के साथ हो रही बर्बरता की घटनाओं पर चिंता जताते हुए पीएम मोदी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। गहलोत ने एक्स पर लिखा- बांग्लादेश से आ रही हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ बर्बरता की खबरें विचलित करने
गहलोत ने लिखा-
1971 के उस दौर की यादें आज भी ताजा हैं, जब इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत ने न केवल कूटनीतिक कड़ापन दिखाया था, बल्कि अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से इतिहास और भूगोल दोनों बदल दिए थे। उन्होंने अमेरिका जैसी महाशक्ति तक की परवाह नहीं की, जिसने भारत के खिलाफ अपना सातवां बेड़ा रवाना कर दिया था।

जिसका निर्माण भारत ने किया वो ही देश आज भारत के खिलाफ
गहलोत ने लिखा- यह भी चिंताजनक है कि ऐसा देश जिसका निर्माण ही भारत ने किया था वह भारत के खिलाफ हो गया है। यह भारत सरकार की कूटनीतिक विफलता है। केंद्र सरकार को गहरी चिंता व्यक्त करने जैसे रस्मी बयानों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठाने चाहिए। पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के जीवन और मान-सम्मान की रक्षा करना हमारी नैतिक और कूटनीतिक जिम्मेदारी है।

राइजिंग राजस्थान-प्रवासी राजस्थानी दिवस का नाटक हो चुका फेल
गहलोत ने डिजिफेस्ट समिट को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। गहलोत ने लिखा- राजस्थान में आज प्रशासनिक और सरकारी अराजकता का आलम यह है कि न कहने वाला है न देखने वाला है। प्रदेश की जनता के हक के पैसे की ऐसी बर्बादी पहले कभी नहीं देखी गई।
इनको पूछो, आखिर जनता को क्या मिला ? राइजिंग राजस्थान और प्रवासी राजस्थानी दिवस का नाटक फेल हो चुका है। इनमें निवेशक नदारद दिखे। खेलो इंडिया गेम्स में खिलाड़ियों की दुर्दशा हुई और न प्रतिभागी आए न ही दर्शक। अब डिजिफेस्ट में अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा।
भाजपा सरकार में कोई जवाबदेही नहीं बची
उन्होंने आगे भाजपा सरकार पर सवाल उठाते हुए लिखा- भाजपा सरकार सिर्फ प्रचार और खुद की वाहवाही करने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए बहा रही है। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद जनता पूछ रही है कि आखिर क्या परिणाम निकला ? इस सरकार में कोई जवाबदेही नहीं बची है। आखिर कब तक प्रदेश की जनता के पैसे को ऐसे उड़ाया जाता रहेगा और इसकी जवाबदेही कब तय होगी?
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