राज्य सरकार ने जिलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया के तहत बालोतरा और बाड़मेर जिलों की सीमाओं में आंशिक बदलाव किया है। इस नए आदेश की अधिसूचना शुक्रवार देर रात सामने आने के बाद यह मामला तेजी से चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया पर आदेश वायरल होते ही दोनों जिलों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कहीं लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया तो कहीं असंतोष और नाराजगी भी दिखाई दी।
यह नया संशोधन ऐसे समय में आया है जब जिले और उनकी सीमाओं को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस चल रही थी। अब इस बदलाव ने प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।
ताजा बदलाव क्या है?
राज्य सरकार के आदेश के अनुसार, गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को औपचारिक रूप से बालोतरा जिले में शामिल कर दिया गया है। वहीं बायतू उपखंड को बालोतरा जिले से हटाकर बाड़मेर जिले में शामिल किया गया है। इसके बावजूद बायतू के दो तहसील गिड़ा और पाटोदी अब भी बालोतरा जिले का हिस्सा रहेंगी। इस बदलाव ने प्रशासनिक संतुलन में नई स्थिति पैदा कर दी है और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं को तेज कर दिया है।
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बालोतरा जिले की नई प्रशासनिक संरचना
नए आदेश के बाद बालोतरा जिले का प्रशासनिक ढांचा अब पहले से ज्यादा विस्तृत और संगठित हो गया है। बालोतरा जिले में अब 5 उपखंड, 5 उपतहसील और 9 तहसील कार्यरत होंगी।
उपखंड: बालोतरा, सिवाना, सिणधरी, गुड़ामालानी, धोरीमन्ना
उपतहसील: जसोल, पादरू, हीरा की ढाणी, दूदवा, सवाऊ पदमसिंह
तहसील: समदड़ी, पचपदरा, गिड़ा, कल्याणपुर, सिणधरी, गुड़ामालानी, सिवाना, पाटोदी, धोरीमन्ना
मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस प्रशासनिक बदलाव के बाद क्षेत्र में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। बालोतरा जिले में शामिल हुए नए उपखंडों के लोगों में खुशी है क्योंकि अब उन्हें जिला मुख्यालय से प्रशासनिक सेवाएं मिलने में आसानी होगी। वहीं बायतू उपखंड को बाड़मेर जिले में शामिल किए जाने पर कुछ स्थानों पर असंतोष भी देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले और तहसील का निर्धारण केवल भौगोलिक आधार पर नहीं बल्कि जनसुविधा, दूरी, प्रशासनिक पहुंच और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल
इस नए संशोधन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को रिकॉर्ड, सीमांकन, कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र और योजनाओं के क्रियान्वयन को नए सिरे से व्यवस्थित करना होगा। वहीं राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा एक बार फिर गर्माने लगा है और आने वाले दिनों में और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
फिलहाल यह बदलाव बालोतरा और बाड़मेर जिलों के प्रशासनिक ढांचे को नई दिशा देने वाला साबित हो रहा है, जिसका असर आने वाले समय में विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासन पर साफ तौर पर देखने को मिलेगा।
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