पानी का साफ दिखना ही काफी नहीं
गंगा का पानी सुरक्षित नहीं
पर्यावरणविद एस पी सती के अनुसार, गंगा में बड़ी मात्रा में सीवेज गिर रहा है, जिससे इसे सीधे पीने के लिए सुरक्षित नहीं कहा जा सकता. उनका कहना है कि भले ही गंगा का पानी प्राकृतिक रूप से कुछ हद तक स्वयं को साफ करने की क्षमता रखता हो, लेकिन आज के समय में इसमें बैक्टीरिया, वायरस और अन्य सूक्ष्म तत्व पाए जा सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. खासकर बरसात के मौसम में या जब सीवेज का बहाव अधिक होता है, तब संक्रमण का खतरा और भी बढ़ जाता है.
भरोसे और परंपरा के आधार पर पानी की सुरक्षा तय नहीं की जा सकती
गंगा जल को बिना जांच, फिल्टरिंग या उबाल के सीधे पीना सुरक्षित नहीं है. ऋषिकेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा जल को पीने योग्य मानते हैं और कई लोग इसे घर भी ले जाते हैं. हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो किसी भी प्राकृतिक जल स्रोत को पीने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच जरूरी होती है. पानी में कोलीफॉर्म बैक्टीरिया, भारी धातुएं और अन्य हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं, जो आंखों से दिखाई नहीं देते. इंदौर की घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां देखने में साफ पानी ने लोगों की जान ले ली. यह हादसा बताता है कि केवल भरोसे और परंपरा के आधार पर पानी की सुरक्षा तय नहीं की जा सकती.
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