दौसा: जिले की ग्राम पंचायत करनावर और मुसोलाई में स्कूलों को नए स्थान पर ट्रांसफर करने को लेकर ग्रामीणों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपने बच्चों को स्थानांतरित किए गए नए स्कूल भवन में भेजने से रोक दिया।
स्कूल ट्रांसफर को लेकर ग्रामीणों का विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि स्थानांतरित स्कूल उनके गांव से लगभग 1-2 किलोमीटर दूर है। छोटे बच्चों को इतनी दूरी अकेले भेजना खतरनाक है और उन्हें कुत्तों का डर भी रहता है। उन्होंने पहले भी स्कूल को उसके मूल स्थान पर बनाए रखने की मांग की थी।
पुराने भवन की स्थिति और निजी भवन की व्यवस्था
ग्राम पंचायत करनावर के प्रशासक सुनील बेरवा ने बताया कि पुराने स्कूल भवन की हालत जर्जर हो चुकी थी, जिससे वहां पढ़ाई कराना संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने मिलकर एक निजी भवन का इंतजाम किया है और इसके संबंध में विभाग को एग्रीमेंट के साथ सूचना दे दी गई है। इस पूरे मामले पर बसवा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी शीला मीणा ने कहा कि नए भवन के लिए उच्च अधिकारियों को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि प्रस्ताव पर जवाब आने के बाद ही स्कूल के भविष्य को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
मूसोलाई में विरोध प्रदर्शन
ग्राम मूसोलाई में ग्रामीणों ने स्कूल को 8 किलोमीटर दूर हरियाणा गांव में शिफ्ट करने के विरोध में प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने स्कूल गेट पर ताला लगा दिया और बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया। ग्रामीणों ने बताया कि 17 नवंबर 2025 को मूसोलाई में नवीन स्कूल भवन का भूमि पूजन हो चुका है, जिसकी अनुमानित लागत 98 लाख रुपए है। इसके बावजूद शिक्षा विभाग स्कूल को हरियाणा स्थानांतरित करने की तैयारी कर रहा है, जिसे ग्रामीण किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।
निजी भवन नि:शुल्क उपलब्ध कराया
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि जब तक नया स्कूल भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक उन्होंने एक निजी भवन नि:शुल्क स्कूल प्रशासन को सौंप दिया है, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। इसके बावजूद प्रशासन स्कूल को हरियाणा स्थानांतरित करने का दबाव बना रहा है।
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बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे बच्चों को गांव से बाहर नहीं भेजने देंगे। यदि स्कूल हरियाणा ले जाया गया, तो वे 80 छात्र-छात्राओं की टीसी कटवाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल को आठ किलोमीटर दूर भेजना छोटे बच्चों के लिए असुरक्षित और अव्यवहारिक है, और उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भूमि पूजन के बाद भी स्कूल शिफ्टिंग का फैसला तुरंत रद्द किया जाए।
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