सीमा पार से घुसपैठ, ड्रोन के जरिए हथियारों की तस्करी और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में छिपे आतंकियों की नई चुनौतियों ने जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा का परिदृश्य बदल दिया है। युद्ध के इन बदलते स्वरूपों और उभरती चुनौतियों के बीच अब ग्राम रक्षा समूह (वीडीजी) की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक हो गई है। जम्मू संभाग में बीते तीन वर्षों में बढ़ी आतंकी गतिविधियों को देखते हुए पुलिस, सेना और बीएसएफ अब वीडीजी सदस्यों को फर्स्ट रिस्पोंडर (प्रथम प्रतिक्रिया देने वाली इकाई) के रूप में तैयार करने के लिए त्रि-स्तरीय विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।
पिछले तीन वर्षों में रामबन को छोड़कर जम्मू संभाग के लगभग सभी जिलों में आतंकी मुठभेड़ हुई हैं। किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ जैसे जिलों के दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में आतंकियों की सक्रियता सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। चूंकि इन इलाकों में सुरक्षा बलों के पहुंचने से पहले स्थानीय ग्रामीण ही मौके पर मौजूद होते हैं इसलिए वीडीजी को सशक्त बनाना अनिवार्य हो गया है। वीडीजी को प्रशिक्षण के तहत एसएलआर जैसे सेमी-ऑटोमेटिक हथियारों के इस्तेमाल, आतंकी हमले की स्थिति में त्वरित व प्रभावी प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाया जा रहा है।
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