अर्फिया ने अपने पिता फरीदुद्दीन से ही एयर राइफल से निशाना लगाना सीखा। उसकी प्रतिभा को सबसे पहले शूटिंग एसोसिएशन टोंक के अध्यक्ष फैसल खान ने पहचाना। पिछले छह महीनों से वह नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही है। हाल ही में भोपाल में आयोजित 68वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में अर्फिया ने ऐसा प्रदर्शन किया कि वहां मौजूद अनुभवी निशानेबाज और राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता भी हैरान रह गए। उसने 600 में से 603 अंक हासिल कर सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया।
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इस शानदार प्रदर्शन के पीछे एक बेहद दर्दनाक कहानी भी जुड़ी है। चैंपियनशिप से महज 12 दिन पहले अर्फिया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था।18 दिसंबर को उसके पिता फरीदुद्दीन अपने दो भाइयों और भतीजे के साथ टोंक से कोटा जा रहे थे, तभी बूंदी जिले के सीलोर के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर एक बजरी से भरे डंपर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसा इतना भयावह था कि पिता, दोनों चाचा और चचेरा भाई मौके पर ही दुनिया छोड़ गए। इस हादसे ने अर्फिया की दुनिया ही बदल दी, लेकिन उसके सपने को नहीं तोड़ सका।
अर्फिया कहती हैं कि इतने बड़े हादसे के बाद भोपाल जाकर चैंपियनशिप में हिस्सा लेना उसके लिए बेहद कठिन था। वह टूट चुकी थी लेकिन उसके कोच, परिवार और शूटिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष फैसल सईदी ने उसे बार-बार पिता के सपने की याद दिलाई। उसी हौसले ने उसे आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
गौरतलब है कि अर्फिया का चयन 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग इवेंट के लिए हो गया है। अब वे 14 और 15 जनवरी को पुणे में आयोजित राष्ट्रीय ट्रायल में फिर से अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दोहराने की कोशिश करेगी, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर होने वाली शूटिंग प्रतियोगिता में भारतीय टीम में जगह बना सके।
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