खरगोन मकर संक्रांति के पावन पर्व पर शहर के प्राचीन एवं प्रसिद्ध श्री नवग्रह मंदिर में सूर्य उपासना का भव्य आयोजन श्रद्धा और आस्था के साथ संपन्न हुआ। उत्तरायण काल के आरंभ अवसर पर तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी। इस अवसर पर भगवान सूर्यदेव, नवग्रह एवं मां बगलामुखी का विशेष पूजन-अर्चन विधि-विधान से किया गया।
मकर संक्रांति के दिन जैसे ही सूर्यदेव की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह में पहुंची, वहां स्थापित भगवान सूर्यदेव का प्राकृतिक अभिषेक हुआ। इस अलौकिक और दुर्लभ दृश्य के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में उपस्थित रहे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और विशेष रूप से शक्तिशाली माने जाते हैं, इसी कारण मकर संक्रांति पर यहां दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है।
पूजन के दौरान भगवान सूर्यदेव के साथ नवग्रह, मां बगलामुखी एवं ब्रह्मास्त्र महायंत्र की विधिवत पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने तिल-गुड़, खिचड़ी एवं तिल-गुड़ के मोदक का भोग अर्पित किया। मंदिर के पुजारी पंडित लोकेश जागीरदार ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन पूजा-अर्चना करने से नवग्रह दोषों की शांति होती है तथा सूर्यदेव की कृपा से तेज, ऊर्जा और कार्यों में प्रगति प्राप्त होती है। श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़ एवं मसूर दाल का दान भी किया।
ब्रह्म मुहूर्त में भगवान सूर्यदेव एवं मां बगलामुखी का विशेष अभिषेक किया गया, जिसके पश्चात सूर्योदय के समय भव्य महाआरती का आयोजन हुआ। आरती के दौरान संपूर्ण मंदिर परिसर मंत्रोच्चार और भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
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करीब 250 वर्ष प्राचीन इस सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर की स्थापत्य कला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर के तीन शिखर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक माने जाते हैं, जबकि मंदिर की सीढ़ियां सात वार, बारह महीने और बारह राशियों के जीवन चक्र को दर्शाती हैं।
मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही इस मंदिर की स्थापना हुई थी और तभी से सत्यनारायण कथा पाठ की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सत्यनारायण भगवान की कथा एवं पूजन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
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