अगर किसी बच्चे को कई दिनों तक तेज बुखार बना रहे और वह सामान्य दवाओं से ठीक न हो तो सावधान हो जाइए। यह सिर्फ वायरल नहीं बल्कि दिल को मर्ज दे सकता है।
चंडीगढ़ में बच्चों को प्रभावित करने वाली कावासाकी डिजीज के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसका खुलासा पीजीआई के शोध में हुआ है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में 2024 में प्रकाशित किया गया।
पीजीआई के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के इस शोध के प्रमुख लेखक डॉ. राकेश कुमार पिलानिया हैं जो पीजीआई में पीडियाट्रिक रूमेटोलॉजी से जुड़े हैं। उनके साथ पीजीआई के अन्य वरिष्ठ डॉक्टर और शोधकर्ता भी इसका हिस्सा रहे।
83 बच्चों में कावासाकी की पुष्टि
यह रिसर्च 2015 से 2019 तक के आंकड़ों पर आधारित है। 2015 से 2019 के बीच चंडीगढ़ में कुल 83 बच्चों में कावासाकी बीमारी की पुष्टि हुई। इनमें 66 लड़के और 17 लड़कियां शामिल थीं। सबसे ज्यादा असर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में देखा गया। रिसर्च टीम ने 1994 से 2019 तक के आंकड़ों का ट्रेंड एनालिसिस भी किया। इसमें सामने आया कि कावासाकी बीमारी के मामलों में हर महीने धीरे-धीरे लेकिन लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
शोध में यह भी पाया गया कि बीमारी के शुरुआती दौर में करीब 17 प्रतिशत बच्चों में दिल की धमनियों में सूजन या असामान्य बदलाव पाए गए। हालांकि, समय पर इलाज मिलने से छह सप्ताह के फॉलोअप में यह संख्या घटकर करीब 7 प्रतिशत रह गई। शोधकर्ताओं के अनुसार मामलों में बढ़ोतरी की एक वजह डॉक्टरों में इस बीमारी को लेकर बढ़ी जागरूकता भी हो सकती है जिससे अब इसकी पहचान ज्यादा हो रही है। यह रिसर्च न केवल चंडीगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों के लंबे बुखार को नजरअंदाज न किया जाए।
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