बाड़मेर जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की स्थिति चिंताजनक है। भास्कर टीम सनावड़ा, बाछड़ाऊ और मांगता के अस्पतालों में पहुंची तो वहां इलाज नहीं, बीमार सिस्टम मिला। कहीं अस्पताल खंडहर बन चुके हैं तो कहीं डॉक्टर गायब। सनावड़ा अस्पताल एक कमरे में शिफ्ट कर रखा है, जिसमें 10 का स्टाफ है। दवाई काउंटर से लेकर डॉक्टर, वार्ड, लैब एक ही कमरे में है। सवाल ये है कि मरीजों के जख्मों का इलाज कौन करेगा, जब अस्पताल खुद ही कोमा में हैं। दूर-दराज से आने वाले मरीजों की उम्मीद तब दम तोड़ रही है। “सनावड़ा अस्पताल खंडहर है, रिपेयरिंग के लिए प्रपोजल भेजा हुआ है। डॉक्टर अगर ड्यूटी के प्रति लापरवाह है तो उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
-विष्णुराम विश्नोई, CMHO बाछड़ाऊ व मांगता PHC यहां भी डॉक्टर गायब भास्कर टीम सुबह 11 बजे बाछड़ाऊ पहुंची तो यहां भी डॉक्टर की सीट खाली थी। बताया गया कि सीएमएचओ ऑफिस गए हुए है। यहां सरकार ने 7 माह पूर्व ही नई बिल्डिंग पीएचसी की बनाई है। अन्य स्टाफ भी बाहर धूप सेंकता नजर आया। इसी तरह 11:30 बजे पीएचसी मांगता में भी डॉ. राधेश्याम नहीं मिले। स्टाफ से पूछने पर बताया कि फील्ड में गए है। यहां भी फार्मासिस्ट भी नहीं था। 5 दिसंबर को ही नई बिल्डिंग में पीएचसी ट्रांसफर हुई है। सनावड़ा: एक ही कमरे में पीएचसी एमओ, एनओ दोनों ड्यूटी पर नहीं भास्कर टीम सुबह 10:15 बजे सनावड़ा पीएचसी पहुंची तो पीएचसी पर ताला था। पता किया तो बताया कि बिल्डिंग खंडहर है। पीएचसी पास के एक कमरे में चल रही है। कमरे में डॉ. देव प्रकाश और एमओ सूर्य प्रकाश दोनों ड्यूटी पर नहीं थे। स्टाफ ने बताया कि अब तक ड्यूटी पर नहीं आए है। मौके पर एएनएम पेमी और अन्य स्टाफ था, लेकिन एलटी विजय कुमार, एलए रुगाराम, एसएचएस अनवर खां नहीं थे। स्टाफ ने बताया कि कहने को तो पीएचसी है, लेकिन यहां शौचालय भी नहीं है। सफाई के लिए कोई कर्मचारी नहीं है। स्टाफ खुद ही टांके से पानी भरता है। एक ही कमरे में डॉक्टर, दवा काउंटर, टीकाकरण, वैक्सीन, चेकअप, लैब सभी है। मरीजों ने बताया कि यहां डॉक्टर दोपहर 1-2 बजे आते हैं और साइन करके चले जाते हैं, सिर्फ कागजों में ही ओपीडी है। कम्प्यूटर में डेटा एंट्री कर दी जाती है। मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है।
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