जिले में जीवनरक्षक मानी जाने वाली 108 एंबुलेंस सेवा के दुरुपयोग का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। वन विभाग की टीम ने शुक्रवार को गोटेगांव के बरहेटा जंगल क्षेत्र में एक एंबुलेंस को पकड़ा, जिसमें मरीजों के बजाय कीमती सागौन की लकड़ियां भरी हुई थीं। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जंगल के रास्ते चल रही थी लकड़ी तस्करी
वन विभाग की टीम नियमित गश्त पर थी, तभी उन्हें गुप्त सूचना मिली कि जंगल के रास्ते एंबुलेंस के जरिए लकड़ी की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही अधिकारियों ने इलाके में घेराबंदी कर संदिग्ध एंबुलेंस को रोक लिया।
जब वाहन की तलाशी ली गई, तो अंदर का दृश्य देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। एंबुलेंस के भीतर सागौन के 10 बड़े लट्ठे लोड थे।
6 आरोपी गिरफ्तार
वन विभाग के अधिकारी ब्रजेश पांडे ने बताया कि मौके से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जब्त की गई लकड़ी की कीमत और माप का आकलन किया जा रहा है। जांच इस दिशा में भी की जा रही है कि सागौन की लकड़ी कहां से काटी गई थी और इसे कहां सप्लाई किया जाना था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पकड़ी गई एंबुलेंस धमना अस्पताल से संबद्ध बताई जा रही है। यह तथ्य सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है, क्योंकि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा का उपयोग अवैध काम के लिए किया गया।
जांच के आदेश
एंबुलेंस जैसी जरूरी सेवा के दुरुपयोग पर अपर कलेक्टर गजेंद्र नागेश ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि एंबुलेंस किसके नियंत्रण में थी और इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई। प्रशासन अब भोपाल स्थित 108 सेवा के मुख्य कार्यालय से भी संपर्क करेगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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पूछताछ जारी
फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। वन विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच में कई और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। अब देखना होगा कि जांच में किन-किन जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है।
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