Barmer Mukka Kala: भारत-पाक बंटवारे के बाद बदली सरहदों के बीच भी संस्कृति की डोर आज तक जुड़ी हुई है. बाड़मेर के मिठडाउ गांव की समझू देवी सिंध की पारंपरिक मुक्का कला को दशकों से संजोए हुए हैं. 1971 में पाकिस्तान से भारत आने के बाद उन्होंने इसी हस्तकला को आजीविका का साधन बनाया. आज उनका हुनर देश ही नहीं, विदेशों तक पहचान बना चुका है. मुक्का कला सिर्फ कढ़ाई नहीं, बल्कि सिंधी संस्कृति और नारी परंपरा की जीवित पहचान है.
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