ग्रामीण परिवेश और सुविधाओं की कमी से पढ़ाई इंटर तक ही हो सकी, पर मन में कुछ अलग करने की इच्छा हो तो परिस्थितियां बाधक नहीं बन सकतीं। बांका के शंभूगंज प्रखंड के वैदपुर पंचायत अंतर्गत मझघाय गांव के रहने वाले हैं सुदर्शन कुमार। इंटर की पढ़ाई के बाद घर-परि
पारंपरिक खेती की जगह कुछ अलग करने की ठानी। नौकरी की राह अपनाने की बजाय उन्होंने किसान बनकर आर्थिक कमाई शुरू किया। इलाके में सभी पारंपरिक खेती करते थे। सुदर्शन ने कुछ अलग करना चाहा। परिवार का सपोर्ट नहीं होने के बावजूद हाइब्रिड नर्सरी के कारोबार में हाथ आजमाया। पहले से कोई इस तरह का बैकग्राउंड नहीं था।
5 साल तक हाइब्रिड पौधे तैयार करने का लिया ट्रेनिंग
उन्होंने वर्ष 2017 में आत्मा के द्वारा बांका में 5 वर्ष तक नर्सरी में हाइब्रिड पौधे तैयार करने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने अपने जमीन पर प्रशिक्षण के उपरांत प्रयोग करने के लिए कुछ पौधे तैयार किए। इन्होंने बैगन के पौधे में टमाटर, एक आम के वृक्ष में पांच तरह के आम के पौधों को तैयार किया। तकनीक की मदद से मीठी पत्तागोभी भी ये उपजाते हैं, जिसे कच्चा ही खाया जा सकता है।
कई गांवों के लोग देखने और नर्सरी के टिप्स सीखने आते हैं।
अन्य लोगों को भी प्रतिदिन का रोजगार दे रहे सुदर्शन कुमार
वर्तमान में सुदर्शन न सिर्फ खुद का नर्सरी का व्यवसाय कर रहे हैं, बल्कि अपने इस काम की बदौलत आधा दर्जन अन्य लोगों को भी प्रतिदिन का रोजगार दे रहे हैं। उन लोगों की बेरोजगारी दूर कर रहे हैं। सुदर्शन की उन्नत नर्सरी की खासियत और प्रसिद्धि ऐसी है कि आसपास के कई गांवों के लोग इसे देखने व नर्सरी के टिप्स सीखने आते हैं।
बांका के साथ अन्य जिलों में भी पौधों की डिमांड
सुदर्शन कुमार अपनी नर्सरी में वैज्ञानिक तकनीकों की बदौलत हाइब्रिड पौधे तैयार करते हैं। इनकी नर्सरी में तैयार पौधों की डिमांड पूरे बांका जिले ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी काफी ज्यादा है। वे बताते हैं कि एक आम के पौधे में पांच तरह के आम की पैदावार को देखने की जिज्ञासा उनके यहां आने वाले किसानों में ज्यादा होती है। लोग जानना चाहते हैं कि ऐसा कैसे संभव है। हालांकि इसकी तकनीक कोई ज्यादा मुश्किल नहीं है। हालांकि इसके लिए सब्र के साथ प्रयोग को पूरा करने की जरूरत होती है।

साल भर में 70 से 80 किलो टमाटर की उपज होती है।
VNR 212 बैगन की प्रजाति भी लगा रखे
वे अपनी नर्सरी में हरी मिर्च के एक पौधे से 12 माह में तकरीबन 22 से 24 किलो हरी मिर्च की पैदावार लेते हैं। VNR 212 बैगन की प्रजाति भी वे लगा रखे हैं। इसका आच्छादन क्षेत्रफल ज्यादा होता है। यह ज्यादा भूभाग में पसरता है। इससे बैगन की उत्पादन दर भी काफी ज्यादा होती है। इसके अलावा कई तरह की हाइब्रिड सब्जी फसलों को उपजाते हैं।
सुदर्शन इन तकनीकों के प्रचार-प्रसार के लिए भी काम करते हैं, ताकि उन्नत तकनीकों को अपनाकर उनके इलाके के किसान उन्नति की राह पर चल सकें। वे अपनी नर्सरी में पौधे तैयार कर लोगों को उचित दाम पर उपलब्ध कराते हैं। खासकर बैगन के पौधे में टमाटर की फसल को देखने व इसकी तकनीक को सीखने को काफी किसान उत्सुक रहते हैं। एक पौधे में तकरीबन साल भर में 70 से 80 किलो टमाटर की उपज होती है।

प्रखंड के BAO संकेत तिवारी सुदर्शन की नर्सरी को देख चुके हैं।
हर महीने 60 से 70 हजार तक का करते हैं कमाई
सुदर्शन बताते हैं कि वे अपनी नर्सरी से प्रतिमाह 60 से 70 हजार रुपए तक कमाई कर लेते हैं। अब उन्हें लगता है कि नौकरी के क्षेत्र में नहीं जाने का उनका निर्णय सही था। सुदर्शन बताते हैं कि बैगन के पौधे में फलने वाले टमाटर से सालों भर सब्जी की जरूरत पूरी होती है। एक घर में सिर्फ पांच पौधे लगा दिए जाएं तो फिर सब्जी खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती है।
शंभूगंज प्रखंड के बीएओ संकेत तिवारी सुदर्शन की नर्सरी को देख चुके हैं। उनका कहना है कि अन्य किसानों को भी सुदर्शन से प्रेरणा लेनी चाहिए। वैदपुर पंचायत के मुखिया किसलय कुमार कहते हैं- सुदर्शन हाइब्रिड पौधे तैयार करने वाले माहिर किसान हैं। वे शुरू से ही काफी मेहनती रहे हैं। इस कारोबार की बदौलत वह अपना आर्थिक उपार्जन कर उन्नति कर रहे हैं। कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं।
इन प्रगतिशील किसान से और जानें 9534847256
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