पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम स्वनिधि योजना के हितग्राहियों को अब एमपी सरकार 14 फीसदी ब्याज दर पर लोन देगी । इसके अलावा जिन हितग्राहि्यों को बैंकों ने ब्याज की रकम काटकर लोन दिया था उन्हें अब ये राशि वापस लौटाई जाएगी। योजना की नोडल एजेंसी नगरीय प्र
दरअसल, पीएम स्वनिधि योजना ऐसे छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए हैं, जिन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए छोटे लोन की जरूरत पड़ती है। योजना के तहत केंद्र 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी देता है और बैंक का बाकी बचा ब्याज अनुदान मप्र सरकार देती है। हितग्राहियों को शून्य ब्याज पर पूरी रकम देने का प्रावधान है, लेकिन बैंक हितग्राहियों को ब्याज की रकम काटकर ये राशि दे रहे थे।
सूत्र बताते हैं कि इसकी वजह से हितग्राहियों का योजना से मोहभंग हो रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा गया। मंत्रालय ने राज्य सरकार से अपर कैप लगाने की सहमति दे दी है यानी अब हितग्राहियों को 14 फीसदी ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा और बैंक बिना ब्याज काटे ये राशि हितग्राहियों को देंगे.. पढ़िए रिपोर्ट
पीएम स्वनिधि योजना में क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना को केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित हुए रेहड़ी-पटरी वालों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए शुरू किया था। ये एक माइक्रो-क्रेडिट योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे व्यापारियों को बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी( वर्किंग कैपिटल) उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपना व्यवसाय फिर से शुरू कर सकें।
- योजना का स्वरूप: इस योजना के तहत पहले 10 हजार, फिर 20 हजार और अंत में 50 हजार रुपए तक का लोन तीन चरणों में दिया जाता है।
- ब्याज सब्सिडी: योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्रभावी रूप से एक शून्य-ब्याज लोन है। केंद्र सरकार लोन पर 7% की ब्याज सब्सिडी देती है, और इससे ऊपर का जो भी ब्याज बैंक लगाता है, उसका वहन राज्य सरकार करती है।
- डिजिटल प्रोत्साहन: डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 1200 रुपए तक का कैशबैक भी दिया जाता है।
- पुराना लोन चुकाया तो नए के लिए पात्र: योजना के मुताबिक हितग्राही तीन महीने की समय सीमा में लोन की मूल राशि चुका देता है तो वह अगली बार 20 हजार रुपए के लोन के लिए पात्र होता है। यदि यह रकम तय समय पर जमा करता है तो वह 50 हजार रुपए तक के लोन के लिए पात्र होता है।

योजना को लेकर केंद्र सरकार को लिखा गया पत्र।
योजना में अब तक क्या हो रहा था योजना के तहत मध्य प्रदेश में 32 सरकारी और निजी बैंक लोन बांट रहे थे। नियम के अनुसार, बैंकों को हर तीन महीने में सरकार से ब्याज सब्सिडी की राशि का दावा (क्लेम) करना होता है, जिसे सरकार सीधे हितग्राही के लोन खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करती है। लेकिन, ज्यादातर बैंक इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय एक आसान रास्ता अपना रहे थे:
- ब्याज की एडवांस कटौती: बैंक हितग्राही को लोन देते समय ही ब्याज की अनुमानित राशि काटकर शेष रकम देते थे।
- सब्सिडी क्लेम में देरी: वे सरकार से सब्सिडी का क्लेम 6 महीने या उससे भी अधिक समय के बाद करते थे। इस देरी के कारण कई बार हितग्राहियों के लोन अकाउंट बंद हो जाते थे और सब्सिडी की राशि उन तक कभी पहुंच ही नहीं पाती थी।
- हितग्राहियों पर दोहरा बोझ: इससे स्ट्रीट वेंडर्स को न केवल कम लोन राशि मिलती थी, बल्कि वे उस ब्याज को भी चुका रहे थे जिसे सरकार को वहन करना था। इस वजह से उनका योजना के प्रति आक्रोश और उदासीनता बढ़ रही थी। कई हितग्राही 10 हजार का पहला लोन चुकाने के बाद 20 हजार के दूसरे लोन के लिए हतोत्साहित हो रहे थे।

बैंकों की 25% तक की ब्याज दरें, सरकार को नुकसान मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब नगरीय प्रशासन विभाग की समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि कुछ बैंक इस योजना के तहत 24.91% जैसी अत्यधिक ब्याज दरें वसूल रहे थे। यह जनकल्याणकारी योजना के मूल सिद्धांतों के खिलाफ था। इस मुद्दे को लेकर विभाग के अपर आयुक्त ने 13 सितंबर 2024 को केंद्र सरकार को एक पत्र लिखा।
इसमें सुझाव दिया गया कि जिन बैंकों की ब्याज दर 20% से अधिक है, उन्हें योजना से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए या कम से कम 12% से अधिक ब्याज दर वाले बैंकों के लिए नीतिगत निर्णय लिया जाना चाहिए।
केंद्र तक कैसे पहुंचा मामला? बैंकों की मनमानी और योजना की विफलता का यह मामला 2024-25 के बजट की तैयारी के दौरान सामने आया। इसके बाद राज्य सरकार ने विभिन्न स्तरों पर इस मुद्दे को उठाया।
- 30 अप्रैल 2024: तत्कालीन नगरीय प्रशासन आयुक्त भरत यादव ने योजना के मिशन डायरेक्टर राहुल कपूर को पत्र लिखकर ब्याज सब्सिडी और पैसा पोर्टल के माध्यम से जारी राशि में भारी अंतर की ओर ध्यान दिलाया।
- अगस्त 2024: नगरीय प्रशासन विभाग ने मिशन डायरेक्टर को फिर से पत्र भेजकर बताया कि बैंक सब्सिडी क्लेम नहीं कर रहे हैं।
- 11 नवंबर 2024: मुख्य सचिव अनुराग जैन ने सीधे आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय के सचिव को पत्र लिखकर बैंकों की लापरवाही और योजना की जमीनी हकीकत से अवगत कराया।
इन लगातार प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने मामले का संज्ञान लिया और राज्य सरकार को ब्याज दर पर एक ऊपरी सीमा (अपर कैप) लगाने की सहमति दे दी।

तत्कालीन आयुक्त भरत यादव का पत्र जिसमें बताया गया कि किस तरह से बैंकों ने क्लेम नहीं किया।
क्या बदलाव हुए, हितग्राहियों को कैसे मिलेगा फायदा? केंद्र की सहमति के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जो स्ट्रीट वेंडर्स के लिए गेम-चेंजर साबित होंगे।
- 14% की ब्याज दर सीमा: अब कोई भी बैंक पीएम स्वनिधि योजना के तहत 14% से अधिक ब्याज नहीं वसूल सकेगा। इससे बैंकों की मनमानी पर लगाम लगेगी।
- ब्याज की अग्रिम कटौती बंद: बैंकों को अब हितग्राही को पूरी लोन राशि देनी होगी और वे ब्याज की रकम पहले से नहीं काट सकेंगे।
- 120 करोड़ की वापसी: जिन हितग्राहियों से बैंकों ने पहले ब्याज वसूला था, उनकी पहचान कर लगभग 120 करोड़ रुपए की राशि उनके खातों में वापस की जाएगी।
- बढ़ी हुई लोन राशि: योजना को और आकर्षक बनाने के लिए लोन की राशि भी बढ़ाई गई है। अब पहले चरण में 10 हजार की जगह 15 हजार, दूसरे चरण में 20 हजार की जगह 25 हजार और अंतिम चरण में 50 हजार रुपए का लोन मिलेगा।
- क्रेडिट कार्ड: समय पर लोन चुकाने वाले हितग्राहियों को क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी दी जा रही है।
- कैशबैक: डिजिटल लेन-देन पर फुटकर व्यापार के लिए 1200 रुपए और थोक व्यापार के लिए 400 रुपए का वार्षिक कैशबैक जारी रहेगा।
- सामाजिक सुरक्षा: स्ट्रीट वेंडर्स और उनके परिवारों को जन-धन, पीएम सुरक्षा बीमा, जीवन ज्योति, श्रम योगी मानधन, वन नेशन वन राशन कार्ड और मातृ वंदना जैसी अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है।

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