BPSC MDO Final Result 2026 Topper Interview: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने खनिज विकास पदाधिकारी (MDO) परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. इस परीक्षा में मधेपुरा जिले के मृत्युंजय कुमार ने बिहार में पहला स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है. लोकल 18 ने इनसे खास बातचीत की.
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने खनिज विकास पदाधिकारी (MDO) परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है. इस परीक्षा में साक्षात्कार में शामिल 29 अभ्यर्थियों के लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में प्राप्त अंकों को जोड़कर संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार की गई. इस मेरिट लिस्ट में मधेपुरा जिले के मृत्युंजय कुमार ने पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल कर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन किया है.

मधेपुरा जिले के चौसा प्रखंड के केलाबाड़ी गांव से ताल्लुक रखने वाले मृत्युंजय कुमार की सफलता की कहानी संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत की मिसाल है. एक सामान्य ग्रामीण परिवार में जन्मे मृत्युंजय ने सीमित संसाधनों के बावजूद कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया. वे सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक सुबोध कुमार मंडल के पुत्र हैं. पिता सुबोध मंडल शुरू से ही अपने बेटे के शिक्षा पर जोर दिया.

मृत्युंजय कुमार की प्रारंभिक शिक्षा अररिया जिले के रानीगंज के एक सरकारी विद्यालय से हुई. उस समय उनके पिता वहीं शिक्षक के रूप में पदस्थापित थे. बाद में पिता का स्थानांतरण मधेपुरा हो गया, जिसके बाद उन्होंने वहीं पढ़ाई जारी रखी. चौसा प्रखंड के जनता हाई स्कूल से उन्होंने 2010 में मैट्रिक की परीक्षा 85 प्रतिशत अंकों के साथ पास की. इसके बाद 12वीं की पढ़ाई भी बिहार बोर्ड से पूरी की.
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इंजीनियर बनने के सपने को साकार करने के लिए मृत्युंजय कोटा गए. कड़ी मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्हें देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर में माइनिंग इंजीनियरिंग ब्रांच में दाखिला मिला. 2013 से 2018 के बीच उन्होंने आईआईटी खड़गपुर से बीटेक और एमटेक (माइनिंग) की पढ़ाई पूरी की. इसी दौरान उनके मन में सिविल सर्विस में जाने की इच्छा और भी मजबूत होती गई.

कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी. पढ़ाई पूरी होने के बाद वे दिल्ली जाकर गंभीरता से सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए. हालांकि लॉकडाउन के दौरान बिहार में बीपीएससी के माध्यम से निकली बहाली में उन्होंने परीक्षा दी और 2 के पद पर चयनित हो गए. वर्ष 2020 से 2025 तक वे बीपीएससी कार्यालय में इसी पद पर कार्यरत रहे.

नौकरी के साथ तैयारी करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. कार्यालय का काम निपटाने के बाद वे रात के समय पढ़ाई करते थे. शनिवार-रविवार का पूरा उपयोग करते थे. कई बार परीक्षा और ड्यूटी के कारण छुट्टी मिलना मुश्किल हो जाता था, लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. खनिज विकास पदाधिकारी का सिलेबस उनके इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से जुड़ा होने के कारण उन्हें इस परीक्षा में विशेष रुचि थी. इसीलिए उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी.

परीक्षा के अंतिम दौर में उन्हें ऑफिस के सीनियर अधिकारियों और सहकर्मियों का भरपूर सहयोग मिला. इसी सहयोग के चलते उन्हें दो महीने की छुट्टी मिली, जिसमें उन्होंने इंजीनियरिंग विषयों के साथ-साथ सामान्य अध्ययन और सामान्य ज्ञान का अच्छे से रिवीजन किया. इस दौरान परिवार का भी पूरा साथ मिला.

खासकर पत्नी शिप्रा शालिनी आखिरी पांच महीने अपने बच्चे के साथ मायके जाकर उन्हें कंसंट्रेशन के साथ पढ़ाई करने का माहौल दिया.<br />अपनी सफलता का श्रेय मृत्युंजय कुमार माता-पिता के आशीर्वाद और पत्नी के त्याग को देते हैं. उनकी पत्नी भी बीपीएससी कार्यालय में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. पिता सुबोध मंडल का कहना है कि मृत्युंजय बचपन से ही पढ़ाई में तेज रहा है और मेहनत का फल आज पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल कर मिला है.
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