छपरा जिले के मौजमपुर गांव के रहने वाले रवि शंकर ने बेरोजगारी को अवसर में बदलकर अपनी सफलता की कहानी लिखी है. जयप्रकाश विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के बाद नौकरी न मिलने पर उन्होंने बिहार सरकार की उद्यमी योजना के तहत 10 लाख रुपए का लोन लिया और घर पर ही स्पोर्ट्स कपड़ा का उद्योग शुरू किया. आज उनके इस उद्योग में 10 बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, और उनका उत्पाद छपरा, वैशाली समेत आसपास के जिलों के मॉल और दुकानों में खूब पसंद किया जा रहा है.
रवि शंकर के उद्योग में 10 बेरोजगार युवा और महिलाएं काम कर रही हैं. यहां खिलाड़ियों के लिए टी-शर्ट, लोअर, जर्सी और अन्य स्पोर्ट्स कपड़े तैयार किए जाते हैं. ये उत्पाद केवल जिले के कोने-कोने तक ही नहीं, बल्कि मॉल और पड़ोसी जिला वैशाली तक भी सप्लाई होते हैं. इसके अलावा स्कूल टी-शर्ट और लोअर जर्सी भी यहां तैयार होते हैं.
क्यों है यहां के कपड़े की मांग?
मौजमपुर के कपड़ों की सबसे बड़ी खासियत उनकी क्वालिटी है. सिलाई और कपड़े की बनावट इतनी अच्छी है कि ग्राहक को तुरंत पसंद आ जाती है. ठंड के मौसम में मोटा कपड़ा तैयार किया जाता है, जो पहनने पर ठंड कम करता है. गर्मियों में कॉटन कपड़े तैयार होते हैं. रवि शंकर हरियाणा और दिल्ली से उच्च गुणवत्ता वाला कपड़ा लाकर सिलाई करते हैं. यही वजह है कि यहां के कपड़ों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है.
स्कूल और मॉल भी ऑर्डर करते हैं
मौजमपुर में तैयार होने वाला कपड़ा छपरा और हाजीपुर के बड़े मॉल में भी आसानी से उपलब्ध है. बड़े-बड़े मॉल और स्कूल यहां से ऑर्डर कराते हैं. स्पोर्ट्स दुकान वाले भी यहां से माल खरीदते हैं. रवि शंकर बताते हैं कि जितना ऑर्डर मिलता है, उतना ही कपड़ा तैयार किया जाता है. बाजार की तुलना में यहां कपड़ा सस्ता और क्वालिटी में बेहतर मिलता है.
रवि शंकर कहते हैं कि इस उद्योग ने न केवल उनकी बेरोजगारी खत्म की, बल्कि 10 अन्य लोगों को भी रोजगार मिला. अब उनका लक्ष्य है कि अपने उद्योग को और बढ़ाकर और अधिक लोगों को रोजगार दें.
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