Pali News : पाली-ब्यावर के पिपलिया गांव में असामाजिक तत्वों ने सांड पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी. ग्रामीणों ने बचाया, गोरक्षा सेवा समिति सक्रिय, पुलिस जांच में जुटी, इलाके में आक्रोश है. जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना पिपलिया गांव में हुई, जहां अचानक ग्रामीणों ने एक सांड को आग की लपटों में घिरा हुआ देखा. पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थ की वजह से सांड का पूरा शरीर आग में जल रहा था.
जानकारी के अनुसार, यह दिल दहला देने वाली घटना पिपलिया गांव में हुई, जहां अचानक ग्रामीणों ने एक सांड को आग की लपटों में घिरा हुआ देखा. पेट्रोल जैसे ज्वलनशील पदार्थ की वजह से सांड का पूरा शरीर आग में जल रहा था. दर्द और घबराहट के बीच वह गांव की गलियों में दौड़ता रहा, मानो मदद की गुहार लगा रहा हो. सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखाई देता है कि कैसे बेजुबान जानवर आग की लपटों से घिरा हुआ तड़प रहा है. यह दृश्य देखने वालों की रूह तक को कंपा देने वाला है.
ग्रामीणों की तत्परता से बची जान
घटना की सूचना मिलते ही पिपलिया गांव के ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया. लोगों ने बिना देर किए इस बर्बरता की जानकारी गोरक्षा सेवा समिति को दी. सूचना मिलते ही समिति के सेवादार और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे. सभी ने मिलकर काफी मशक्कत के बाद सांड के शरीर पर लगी आग को बुझाया. इसके बाद गंभीर रूप से झुलसे सांड को तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सालय ले जाया गया. वहां पशु चिकित्सकों की टीम उसका इलाज कर रही है. डॉक्टरों के अनुसार सांड की हालत गंभीर बनी हुई है, क्योंकि आग से उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा है.
इलाके में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
इस अमानवीय घटना के बाद पिपलिया गांव ही नहीं, बल्कि पूरे रायपुर क्षेत्र में जबरदस्त रोष व्याप्त है. ग्रामीणों और गोरक्षा से जुड़े लोगों का कहना है कि इस तरह की क्रूरता किसी भी सभ्य समाज में बर्दाश्त नहीं की जा सकती. लोगों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोषियों की जल्द से जल्द पहचान की जाए और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी बेजुबान जानवर के साथ ऐसा करने की हिम्मत न कर सके.
पुलिस जांच में जुटी
फिलहाल रायपुर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज को खंगाल रही है और संदिग्धों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज में बढ़ती क्रूरता पर सख्त लगाम लगाने की जरूरत कितनी जरूरी हो गई है, ताकि बेजुबान जानवर भी सुरक्षित रह सकें.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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