सीकर के कल्याण सर्किल के पास स्थित सैनी रेस्टोरेंट में बनने वाली यह जलेबी केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि शहर की एक पहचान बन चुकी है. साल 1990 से यहां गोल-गोल, पतली और बेहद स्वादिष्ट जलेबी बनाई जा रही है, जो आज भी उसी पारंपरिक तरीके और स्वाद के साथ लोगों को लुभा रही है. इस जलेबी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल मैदा और चीनी का उपयोग किया जाता है. बिना किसी मिलावट, बिना किसी बनावटी रंग या केमिकल के तैयार की जाने वाली यह जलेबी आज भी अपने असली स्वाद पर कायम है.
बाहर से कुरकुरी और अंदर से रसीली
सैनी जी की जलेबी की खासियत इसकी कड़क और पतली बनावट है, तेल से निकलते ही जब जलेबी को खौलती हुई चाशनी में डुबोया जाता है, तो वह चाशनी को अपने अंदर समेट लेती है और फिर तैयार होती है एक ऐसी जलेबी, जो बाहर से कुरकुरी और अंदर से रसीली होती है, जिसे देखकर किसी के भी मुंह में पानी आ जाए. खास बात यह है कि यह जलेबी दो दिन तक भी स्वाद में ताज़ा बनी रहती है, जो इसकी गुणवत्ता और सही विधि का प्रमाण है.
सर्दी के मौसम में बढ़ जाती है डिमांड
यह जलेबी केवल खाने की चीज़ नहीं, बल्कि लोगों की हर खुशी का हिस्सा बन चुकी है. जन्मदिन हो, सगाई हो, शादी-ब्याह हो या कोई त्योहार, जलेबी बांटना और खिलाना शुभ माना जाता है. सैनी रेस्टोरेंट के संचालक रमेश कुमार ने बताया कि रोजाना यहां करीब 20 किलो जलेबी बनाई जाती है, लेकिन इसकी मांग इतनी अधिक रहती है कि यह जल्दी ही खत्म हो जाती है। कभी-कभी तो इसकी मांग इतनी होती है कि रात को भी जलेबी बनाई जाती है. सर्दी के मौसम में जलेबी की डिमांड सबसे अधिक रहती है.
दो पीढ़ी से वही स्वाद बरकरार
1990 से चले आ रही इस जलेबी का स्वाद कायम रखने की इस परंपरा को रमेश कुमार सैनी पूरी मेहनत और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ा रहे हैं. उनके पिताजी ने जिस स्वाद के साथ इस काम की शुरुआत की थी, वही स्वाद आज दूसरी पीढ़ी बरकरार रखी हुई है. यह केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि स्वाद और विश्वास की विरासत है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है.
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