Agriculture News: तराई क्षेत्रों में बर्फबारी के असर से सीकर जिले में ओलावृष्टि, पाला और शीतलहर ने रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है. गेहूं, चना, सरसों और सब्जियों की फसलें प्रभावित हुई हैं. प्रारंभिक आकलन में करीब 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र में नुकसान सामने आया है. उत्पादन घटने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ गई है.
तराई क्षेत्रों में बर्फबारी के असर से सीकर जिले में ओलावृष्टि, पाला और शीतलहर ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में अचानक बदले मौसम से रबी सीजन की फसलों और सब्जियों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है. गेहूं, चना, सरसों सहित सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है. कई इलाकों में बगीचों के पौधे झुलस गए हैं. पाले के कारण पत्तियां काली पड़ गई हैं. किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है.

इससे उत्पादन घटने की आशंका भी जताई जा रही है. फील्ड से जुटाई जानकारी के अनुसार जिले में करीब तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसलों और सब्जियों को नुकसान हुआ है. सबसे ज्यादा मार खेतों में खड़ी सरसों और सब्जियों पर पड़ी है. किसानों का कहना है कि पाले के कारण सरसों की फलियां सूखने लगी हैं. वहीं चने की फसल में फूल और फल झड़ गए हैं. इससे उपज पर सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है.

ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सरसों की फसल के लिए बीमित किसानों को मुआवजा फसल कटाई प्रयोग के आधार पर ही मिलेगा. योजना के प्रावधानों के अनुसार संबंधित क्षेत्र में किए गए फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त वास्तविक उत्पादन के आंकड़ों के आधार पर नुकसान का आकलन किया जाएगा. इन्हीं आंकड़ों के आधार पर बीमा कंपनी द्वारा दावा स्वीकृत किया जाएगा. इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार बीमा दावा राशि का भुगतान किया जाएगा.
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केंद्र सरकार ने पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना में सीकर जिले में सब्जी की फसल को बीमा के दायरे में शामिल किया है. सीकर जिले में रबी सीजन के दौरान पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा के लिए तहसीलवार सब्जियों को अधिसूचित किया गया है. जिले में हरी मिर्च, टिंडा, टमाटर, फूलगोभी, प्याज, मटर, टमाटर, तरबूज की फसल बीमा के दायरे में है. इन सब्जियों का बीमा करवाने पर किसान को सरकार की ओर से प्रीमियम में अनुदान दिया गया है.

अनुदान की राशि का भुगतान केन्द्र सरकार द्वारा बीमा कंपनी को किया जाएगा. वहीं राज्य सरकार की ओर से भी तय अंशदान बीमा कंपनी को दिया जाएगा. अतिरिक्त निदेशक कृषि सीकर शिवजीराम कटारिया ने बताया कि हालिया शीतलहर और बर्फ जमने की स्थिति से फसलों में कुछ हद तक नुकसान हुआ है. फसलों में हुए वास्तविक नुकसान का आकलन फसल कटाई प्रयोग के आधार पर किया जाएगा. इसके बाद उसी के अनुसार किसानों को मुआवजा दिया जाएगा.

अतिरिक्त निदेशक कृषि सीकर शिवजीराम कटारिया ने बताया कि जिले में बदले मौसम के प्रभाव से कृषि क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है. प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है. इस दौरान चना और सरसों की फसलों पर सबसे अधिक प्रतिकूल असर देखा गया है. वहीं सब्जी फसलों में करीब पांच से नौ प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान लगाया गया है. मौसम की मार से उपज घटने की आशंका बढ़ गई है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है.
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