सिटाकोसिस से सतर्क रहने की जरूरत
उन्होंने आगे कहा कि अगर घर में पालतू तोता है, तो सिटाकोसिस से सतर्क रहने की जरूरत है. यह क्लैमाइडोफिला बैक्टीरिया से फैलने वाला संक्रमण है, जो संक्रमित पक्षियों के सूखे स्त्राव को सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करता है. इसके लक्षणों में बुखार, ठंड लगना, खांसी और शरीर दर्द शामिल हैं. पक्षियों के पिंजरे की रोजाना सफाई इस खतरे को कम कर सकती है.
पिस्सुओं से फैलता है संक्रमण
डॉ पाठक ने कहा कि रिंगवॉर्म और टैपवॉर्म कुत्ते और बिल्लियों में आम पाए जाते हैं. ये संक्रमण पिस्सुओं के जरिए फैलते हैं. हालांकि ये अक्सर हल्के होते हैं लेकिन घर में छोटे बच्चे या गर्भवती महिला होने पर अतिरिक्त सावधानी जरूरी है. रेबीज सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक है, जो संक्रमित जानवर की लार से फैलती है. अगर समय रहते इलाज न मिले, तो यह जानलेवा साबित हो सकती है, इसलिए कुत्तों का नियमित टीकाकरण बेहद जरूरी है.
किडनी को हो सकता है नुकसान
उन्होंने कहा कि इसके अलावा लेप्टोस्पायरोसिस कुत्तों और चूहों से फैलने वाली बीमारी है, जो संक्रमित मूत्र के जरिए पानी और मिट्टी में फैलती है. बुखार, उल्टी और कमजोरी इसके प्रमुख लक्षण हैं और समय पर इलाज न होने पर किडनी को नुकसान पहुंच सकता है. जानवरों से प्यार करना अच्छी बात है लेकिन उनके साथ रहते हुए साफ-सफाई, सतर्कता और नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है ताकि आप और आपका परिवार सुरक्षित रह सके.
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