भीतर बाजार में पतंग की दुकान लगाने वाले लकी केसरवानी बताते है कि तीन पीढ़ियों से उनका यह धंधा चल रहा है. दादा ने इसकी शुरुआत की थी. तभी से हम लोग पतंग का काम कर रहे है. हर साल ट्रेंडिंग डिजाइन वाली पतंगें आती है. इस बार महिला क्रिकेट टीम के वर्ल्ड कप जीतने के चित्रों वाली पतंगें आई है.
ऑपरेशन सिंदूर वाली पतंग की भी खूब डिमांड रही. हमारे देश की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को धूल चटाई थी. उससे जुड़ी चित्रों वाली पतंगें भी आईं थी. आते ही हाथों-हाथ बिक गई. चित्रों की वजह से इस बार 10 वाली पतंग 20 रुपए में बिकी क्योंकि माल कम आया था और डिमांड ज्यादा थी. दो बार खेप आई और दोनों ही बार दो-दो दिन में खत्म हो गई. इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत माता, न्यू ईयर वेलकम वाली पतंगें भी युवाओं द्वारा खूब पसंद की गई. बच्चों के हिसाब से छोटा भीम, डोरेमोन, पब, फ्री फायर, मोटू पतलू जैसी अलग-अलग तरह की पतंगें भी आई है.
लकी बताते है कि डिजाइन के अलावा इस बार मेटल में भी पतंगें आई थी जो आसमान में जाने के बाद अलग तरह से चमकती है. जब सूर्य की रोशनी उन पर पड़ती है तो नीचे की तरफ कई बिंदुओं में झिलमिलाती दिखती है. ये भी खूब पसंद की जा रही है.
2 रुपए से पतंग शुरू होती है. इस बार 2 रुपए से लेकर 30 रुपए तक की पतंगें बाजार में उपलब्ध है. अलग-अलग तरह के धागे और रील भी है. लोग अपनी पसंद के अनुसार प्लास्टिक या लकड़ी की रीलें ले रहे है. अहमदाबाद, गुजरात, जयपुर और दिल्ली से ये पतंगें आई है. छोटे बच्चों के लिए पतंग की पूरी किट उपलब्ध है, जिसमें पतंग, धागा, टैटू, मास्क, रील, हॉर्न, चूर्ण और नकली करेंसी है. यह किट 50 रुपए से लेकर 150 रुपए तक की है.
सागर में बरेली का धागा पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल होता है. पिछले दो-तीन सालों से चीनी मांझा पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. दुकानों पर जिला प्रशासन द्वारा चीनी मांझा की बिक्री प्रतिबंधित करने की सूचना वाले पंपलेट्स चिपकाए गए है. अगर कोई दुकानदार इसे बेचते हुए पकड़ा गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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