Jharkhand High Court Decision: झारखंड हाईकोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों पर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि बुजुर्गों की स्व-अर्जित संपत्ति पर उनका ही सर्वोच्च अधिकार है. रामगढ़ के बुजुर्ग दंपत्ति लखन पोद्दार और उमा रानी की याचिका पर कोर्ट ने कहा कि प्रताड़ित करने वाले बेटा-बहू को घर में रहने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. अदालत ने 2024 के प्रशासनिक आदेश को भी निरस्त कर दिया. फैसले में कहा गया कि जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान, सुरक्षा और मानसिक शांति बुजुर्गों का मूल अधिकार है.
झारखंड हाईकोर्ट ने सीनियर सिटीजन के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है.
दरअसल अदालत का यह महत्वपूर्ण फैसला रामगढ़ के एक बुजुर्ग दंपत्ति की याचिका पर आया है, जिसने प्रशासनिक आदेश को भी पलट दिया. मामला रामगढ़ निवासी लखन पोद्दार और उनकी पत्नी उमा रानी से जुड़ा है. दंपत्ति ने अपने बेटे और बहू पर दुर्व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था. उनका कहना था कि उनकी स्व-अर्जित संपत्ति पर रहते हुए भी उन्हें सम्मान और शांति से जीवन जीने नहीं दिया जा रहा.
बेटा या बहू बुजुर्गों को प्रताड़ित करते हैं तो उन्हें घर में रहने का अधिकार नहीं: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान, सुरक्षा और मानसिक शांति मिलना उनका बुनियादी अधिकार है. यदि बेटा या बहू बुजुर्गों को प्रताड़ित करते हैं, तो उन्हें उस घर में रहने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं दिया जा सकता, भले ही वे उत्तराधिकार का दावा करते हों. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराधिकार का अधिकार भविष्य से जुड़ा होता है, न कि संपत्ति पर तत्काल स्वामित्व से. जब तक संपत्ति जीवित स्वामी के नाम है, तब तक उसके उपयोग और नियंत्रण का पूरा अधिकार उसी के पास रहेगा.
2024 में रामगढ़ उपायुक्त ने बेटा बहू के पक्ष में दिया था फैसला
महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2024 में दिए गए उस प्रशासनिक आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें रामगढ़ के उपायुक्त ने बेटे और बहू के पक्ष में फैसला सुनाया था. अदालत ने माना कि वह आदेश वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं करता था. इस फैसले को वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक अहम न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय न केवल पारिवारिक विवादों में मार्गदर्शक बनेगा, बल्कि बुजुर्गों के सम्मानजनक जीवन के अधिकार को भी मजबूत करेगा.
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