उदयपुर की ग्रेगोरियस स्कूल अपने विवादित कारनामों की वजह से चर्चा में है। तिलक-कलावा प्रतिबंध को लेकर उपजे विवाद के बाद सेंट ग्रेगोरियस स्कूल एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला 12वीं कक्षा की एक सिख छात्रा को कड़ा पहनकर स्कूल आने पर ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) थमाने का है।
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इस कार्रवाई से छात्रा के परिजनों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों में भारी आक्रोश है। वहीं, दूसरी ओर, स्कूल से टर्मिनेट किए गए शिक्षकों का धरना भी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद समाप्त करा दिया गया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
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<p><strong>कड़ा पहनने पर छात्रा को स्कूल से निकाला</strong>
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परिजनों का आरोप है कि 12वीं की छात्रा को लंबे समय से कड़ा पहनने को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। अंततः बोर्ड परीक्षा के महत्वपूर्ण वर्ष में स्कूल प्रशासन ने उसकी टीसी काट दी। छात्रा के पिता ने इस कदम को “मनमाना और शर्मनाक” बताते हुए कहा कि कड़ा सिख धर्म की पहचान और आस्था का प्रतीक है, जिसे हटाने का दबाव बनाना धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। उन्होंने स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग भी उठाई है।
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गौरतलब है कि कुछ दिन पहले इसी स्कूल में तिलक-कलावा पहनने पर रोक के विरोध में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि छात्रा की टीसी का नया विवाद सामने आ गया।
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<strong>टर्मिनेटेड शिक्षकों का धरना पुलिस ने हटवाया</strong>
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इसी बीच, स्कूल की कथित मनमानी के खिलाफ पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे टर्मिनेटेड शिक्षकों को पुलिस ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए धरना स्थल से हटा दिया। धरना हटाए जाने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। शिक्षक अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के सामने अड़े रहे, लेकिन पुलिस कार्रवाई के आगे उन्हें हटना पड़ा। इस दौरान कई शिक्षक भावुक होकर रोते नजर आए और स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।
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शिक्षकों का कहना है कि वे करीब 30 वर्षों से स्कूल में सेवाएं दे रहे थे, इसके बावजूद बिना किसी ठोस कारण के उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। उनका आरोप है कि तिलक-कलावा विवाद के बाद ही उन्हें टारगेट किया गया और उसी के विरोध में वे “स्कूल बचाओ” अभियान के तहत शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे।
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<strong>प्रशासन और स्कूल प्रबंधन पर सवाल</strong>
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छात्रा की टीसी और शिक्षकों के धरने पर हुई कार्रवाई के बाद सेंट ग्रेगोरियस स्कूल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि क्या छात्रा और वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों को न्याय मिल पाएगा या फिर स्कूल प्रशासन की मनमानी पर कोई ठोस कार्रवाई होगी।
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