राजस्थान का बजट 11 फरवरी को विधानसभा के पटल पर रखा जाएगा। इसमें राजस्थान के आय-व्यय अनुमान भी पेश किए जाएंगे। सरकार अपने खर्च का लेखा-जोखा रखने के साथ ही यह भी बताएगी कि प्रदेश पर कर्ज कितना बढ़ चुका है और आने वाले वित्त वर्ष में यह और कितना बढ़ जाएगा। बीते 5 वर्षों में राजस्थान में कर्ज की रफ्तार दोगुनी तेजी से बढ़ी है। मार्च 2022 तक राजस्थान पर कुल कर्ज 3,53,556.08 करोड़ रुपए था। यानी प्रति व्यक्ति लगभग 45 हजार रुपए का औसत कर्ज था, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में यह 7 लाख 23 हजार रुपए प्रोजेक्टेड है और यदि इसी रफ्तार से यह आगे बढ़ा तो आने वाले नए बजट में कर्ज की यह सीमा बढ़कर 8 लाख करोड़ रुपए पार कर जाएगी।
बजट अनुमान के मुताबिक 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन पर 83,775 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इसमें अगले साल भी औसतन 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं आने वाले वित्त वर्ष में पेंशन व्यय 34,146 करोड़ रुपए से 40 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है, जिसमें 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेंशन व्यय में यह तेज बढ़ोतरी आने वाले वर्षों में गंभीर वित्तीय चुनौती बन सकती है।
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ब्याज भुगतान बना हुआ है दबाव
राज्य पर बढ़ते कर्ज का असर ब्याज भुगतान पर भी दिखाई देता है। 2025-26 में ब्याज भुगतान 40,058 करोड़ रुपए बताया गया है, जो भले ही केवल 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता हो लेकिन कुल राजस्व व्यय का बड़ा हिस्सा अब भी ब्याज चुकाने में जा रहा है। वित्त वर्ष 2021-22 में कुल ऋण की स्थिति 3,53,556 करोड़ रुपये थी। अगले वर्ष, 2022-23 में कुल ऋण बढ़कर 3,88,383 करोड़ रुपये हो गया। 2023-24 में कुल ऋण लगभग 571638 करोड़ रुपये हो गया। इसके बाद वित्त वर्ष 2024-25 में यह 641740 करोड़ और मौजूदा वित्त वर्ष में यह लगभग 726384 करोड़ रुपए हो गया।
ऋण के स्रोतवार विवरण (राशि करोड़ रुपए में)
| स्रोत / वर्ष | 31.03.2022 राशि | % | 31.03.2023 राशि | % | 31.03.2024 (सं.अ.) राशि | % |
|---|---|---|---|---|---|---|
| बाजार से उधार | 2,65,186.96 | 75.01 | 3,02,202.85 | 77.81 | 3,56,561.26 | 80.35 |
| वित्तीय संस्थाएं एवं अन्य | 9,901.56 | 2.80 | 10,530.51 | 2.71 | 11,421.03 | 2.57 |
| एन.एस.एस.एफ. | 10,654.03 | 3.01 | 9,069.28 | 2.33 | 7,484.52 | 1.69 |
| अन्य (ब्याज) | 36,064.79 | 10.20 | 29,159.04 | 7.51 | 22,253.29 | 5.01 |
| केन्द्र से ऋण | 31,748.74 | 8.98 | 37,422.21 | 9.64 | 46,047.27 | 10.38 |
| कुल ऋण | 3,53,556.08 | 100.00 | 3,88,383.89 | 100.00 | 4,43,767.37 | 100.00 |
दायित्व एवं ऋण का विवरण ( करोड़ रुपए में)
| स्रोत / वर्ष | 2023-24 (वास्तविक) | 2024-25 (पु.प्रा.) | 2025-26 (ब.प्रा.) |
|---|---|---|---|
| कुल लोक ऋण | 4,46,651.63 | 5,09,578.78 | 5,85,614.36 |
| आंतरिक ऋण | 3,99,857.54 | 4,50,774.67 | 5,10,955.09 |
| केंद्रीय सरकार के उधार | 46,794.09 | 58,804.11 | 74,659.27 |
| अन्य देयताएँ | 1,24,986.87 | 1,32,161.30 | 1,40,770.48 |
| निवेश निधि और बीमा | 70,219.43 | 77,280.23 | 84,661.70 |
| आरक्षित निधि और जमा | 54,767.44 | 54,881.07 | 56,108.78 |
| कुल दायित्व / ऋण | 5,71,638.50 | 6,41,740.08 | 726384.84 |
बजट एनालिसिस एंड रिसर्च सेंटर, जयपुर के निदेशक निसार अहमद का कहना है राजस्थान में 2021-22 में प्रति व्यक्ति औसत कर्ज करीब 45 हजार रुपए था जो अब बढ़कर 88 हजार रुपए हो चुका है और आने वाले बजट में यह बढ़कर 90 हजार रुपए को क्रॉस कर जाएगा, वहीं राजस्व प्राप्तियां पिछले वर्ष के उसी अवधि से कम हुई हैं। केंद्र से आने वाला ग्रांट इन एड भी लक्ष्य का मात्र एक चौथाई ही आ पाया है। जाहिर है कि इससे राज्य में लागू होने वाले केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों की क्रियान्वयन को गति धीमी हुई होगी। पूंजीगत खर्च की धीमी रफ्तार भी चिंताजनक है।
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