पंजाब के लुधियाना के कस्बा रायकोट में बोर्ड कक्षाओं की फाइनल प्रैक्टिकल परीक्षाएं शुरू होने वाले दिन ही जिला प्रशासन द्वारा बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से जुड़ी ड्यूटी सौंपने पर शिक्षकों में नाराजगी फैल गई है। अधिकतर BLO सरकारी स्कूलों के शिक्षक हैं, जिनकी कमी से पहले ही स्कूल जूझ रहे हैं। 30 जनवरी को जारी हुआ पत्र एसडीएम रायकोट कार्यालय की ओर से 30 जनवरी को जारी पत्र के अनुसार 2 फरवरी से यात्रा शुरू है। जिसमें BLOs यात्रियों के साथ जाएंगे। 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के मतदाताओं की सूची तैयार करने और योजना के तहत पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। रायकोट उपमंडल के 188 मतदान केंद्रों के मतदाता इस योजना के पात्र बताए गए हैं। यात्रियों को अमृतसर में स्वर्ण मंदिर, दुर्गियाना मंदिर, जलियांवाला बाग और वाघा बॉर्डर ले जाया जाएगा। इसके अलावा BLOs को तीर्थ यात्रियों को ले जाने वाली बसों के साथ जाने की भी जिम्मेदारी दी गई है। शिक्षकों का कहना है कि यह अतिरिक्त काम ऐसे समय सौंपा गया है, जब उनकी स्कूलों में सबसे ज्यादा जरूरत है। परीक्षा के समय शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना गलत डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट के जिला प्रधान दलजीत सिंह समराला ने फैसले की आलोचना की है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि परीक्षा के समय शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य करवाना गलत है। वहीं लेक्चरर कैडर यूनियन के जिला प्रधान धर्मजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि पहले ही सरकारी स्कूलों में स्टाफ की कमी है और छात्रों के हित में इस आदेश पर पुनर्विचार होना चाहिए। इस मामले पर डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन ने मीडिया से कहा कि परीक्षाएं प्राथमिकता हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि एसडीएम को वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश दिए जाएंगे।
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