बूंदी जिले के हिंडोली थाना क्षेत्र के एनएच-52 पर बासनी बॉर्डर के पास सोमवार दोपहर एक गंभीर सड़क हादसा हुआ, जिसमें जयपुर-कोटा हाईवे पर खड़े पुलिस एस्कॉर्ट वाहन को एक अनियंत्रित ट्रेलर ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में एक एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिनमें से तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के कारण थोड़ी देर के लिए हाईवे पर यातायात ठप हो गया और आसपास अफरा-तफरी मच गई।
मंत्री की सुरक्षा के लिए तैनात किए गए थे पुलिसकर्मी
हिंडोली थाना प्रभारी मुकेश यादव ने बताया कि जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत के बूंदी आगमन को लेकर बासनी बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान जयपुर की ओर से आ रहा ट्रेलर अचानक नियंत्रण खो बैठा और सीधे खड़े एस्कॉर्ट वाहन से टकरा गया। टक्कर इतनी भयंकर थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटनास्थल पर मौजूद अन्य पुलिस कर्मियों और स्थानीय लोगों ने तुरंत सहायता पहुंचाई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने दी पुलिस को जानकारी
घायलों की पहचान एएसआई मोहन लाल, कांस्टेबल विजय सिंह, कांस्टेबल विनोद राम और वाहन चालक के रूप में हुई है। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। हिंडोली थाना की टीम घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को वाहन से बाहर निकालकर एंबुलेंस के माध्यम से हिंडोली सीएचसी भेजा। गंभीर रूप से घायल तीन जवानों को बेहतर इलाज के लिए तुरंत बूंदी रेफर किया गया। चिकित्सकों ने बताया कि तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनकी निगरानी जारी है।
ट्रेलर चालक गिरफ्तार
हादसे के बाद हाईवे पर जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिससे स्थानीय यातायात काफी प्रभावित हुआ। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए ट्रेलर को सड़क से हटवाया और यातायात को पुनः सुचारू किया। पुलिस ने ट्रेलर चालक को हिरासत में ले लिया और हादसे की वास्तविक वजह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि ट्रेलर चालक की लापरवाही और वाहन की तेज गति हादसे का मुख्य कारण रही। पुलिस ने बताया कि मामले के अन्य पहलुओं पर भी जांच जारी रहेगी।
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घटनास्थल पर पहुंचे उच्च अधिकारी
हादसे की जानकारी मिलने के कुछ ही समय बाद पुलिस विभाग के उच्च अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे और घायलों की सेहत के बारे में जानकारी ली। बूंदी जिले में इस तरह की घटनाएं न केवल पुलिस कर्मियों की सुरक्षा के लिए बल्कि आम सड़क सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गई हैं। संबंधित अधिकारियों को अब ठोस कदम उठाकर ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने की आवश्यकता है।
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