प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां में आगमन केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है बल्कि यह पंजाब की राजनीति में गहरे सियासी संकेत भी छिपाए हुए है। मोदी पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने डेरा बल्लां में जाकर नतमस्तक होकर समुदाय के प्रति अपनी नजदीकी दिखाई है।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब में दलित राजनीति, डेरों का सामाजिक प्रभाव और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों पर काम कर रहे हैं।
डेरा सचखंड बल्लां को रविदासिया समुदाय का प्रमुख धार्मिक और सामाजिक केंद्र माना जाता है जिसका प्रभाव जालंधर और दोआबा क्षेत्र की राजनीति पर गहरा है। इस क्षेत्र में अनुसूचित जाति (दलित) की आबादी लगभग 32 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
रविदासिया समुदाय का प्रभाव यहां निर्णायक होता है और ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय किसी एक राजनीतिक दल के साथ स्थायी रूप से नहीं जुड़ा रहा है। समय-समय पर इसका समर्थन कांग्रेस, अकाली दल और हाल में आम आदमी पार्टी को मिलता रहा है जबकि भाजपा की उपस्थिति धीरे-धीरे बढ़ी है।
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