ED investigation kolkata Mamata Banerjee : कोलकाता में इन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट यानी ईडी की छापेमारी अब सिर्फ पश्चिम बंगाल की राजनीति तक सीमित नहीं रह गई है. I-PAC पर हुई कार्रवाई ने बिहार की सियासत में भी हलचल तेज कर दी है. फिलहाल ईडी की जांच कोलकाता केंद्रित है, लेकिन जिस तरह बिहार से जुड़े लेन-देन के आरोप सामने आ रहे हैं, उससे यह मामला सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं दिखता. अब सवाल यह है कि अगर जांच की दिशा बिहार की ओर मुड़ती है तो क्या राज्य की राजनीति एक नए मोड़ पर पहुंच जाएगी?
दरअसल, यह मामला इसलिए भी संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि I-PAC की जड़ें बिहार से ही जुड़ी रही हैं. इसी संस्था की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी जिन्होंने बिहार की राजनीति में बदलाव के बड़े दावे किए और बाद में सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला लिया. भले ही प्रशांत किशोर अब खुद को I-PAC से अलग बता रहे हों, लेकिन संस्था और बिहार की राजनीति के बीच बना रिश्ता पूरी तरह अलग-अलग नहीं माना जा रहा.
ममता बनर्जी का सीधे हस्तक्षेप
दरअसल, ईडी की छापेमारी की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को प्रतीक जैन के आवास पर भेजा. इसके कुछ ही समय बाद ममता बनर्जी खुद लाउडन स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के घर पहुंचीं. इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद एक फाइल उठाई और अपने साथ ले गईं. इसके बाद मुख्यमंत्री I-PAC के कार्यालय भी पहुंचीं. ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह उनकी पार्टी से जुड़े दस्तावेज जबरन उठवा रहे हैं. कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर ईडी की छापेमारी के बाद जिस तरह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सीधे मैदान में उतरीं, उसने इस मामले को सिर्फ जांच नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सियासी टकराव में बदल दिया. अब यही टकराव बिहार की राजनीति के दरवाजे पर दस्तक देता दिख रहा है.
बिहार में किनपर उठे सवाल
दूसरी ओर अब यह मामला बिहार में तूल पकड़ता दिख रहा है क्योंकि बीजेपी सांसद संजय जायसवाल ने इस मामले में बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि I-PAC ने बिहार चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज को करीब 60 करोड़ रुपये दिए थे. जायसवाल के मुताबिक, I-PAC आमतौर पर चुनावी रणनीति के बदले राजनीतिक दलों से फीस लेती है, लेकिन इस मामले में संस्था ने खुद अपनी ओर से पैसा दिया. उन्होंने सवाल उठाया कि जिन कंपनियों के पास 10 करोड़ की पूंजी नहीं है, उन्होंने जनसुराज को 10 करोड़ का चंदा कैसे दे दिया.
बिहार में अवैध फंडिंग के आरोप
बीजेपी सांसद ने आरोप लगाया कि I-PAC अवैध धन के लेन-देन का माध्यम बन चुकी है और इसके तार सीधे प्रशांत किशोर से जुड़े हैं. उन्होंने मांग की कि ईडी को इन सभी मामलों की गहराई से जांच करनी चाहिए. हालांकि, इस पर अभी तक I-PAC या प्रशांत किशोर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. बिहार में सियासी गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि अगर ईडी ने I-PAC से जुड़े बिहार कनेक्शन की फाइल खोली तो क्या यह सिर्फ एक जांच भर रहेगी या फिर राज्य की राजनीति में आने वाले समय की दिशा बदल देगी.
I-PAC और बंगाल चुनाव का पुराना रिश्ता
बता दें कि I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी की स्थापना चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी. वर्ष 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इसी संस्था ने ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी. उस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद I-PAC का नाम राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूती से उभरा. बाद में प्रशांत किशोर ने सक्रिय चुनावी रणनीति से संन्यास लेने और संस्था से अलग होने का ऐलान किया. इसके बाद प्रतीक जैन समेत तीन डायरेक्टरों ने I-PAC की कमान संभाली थी. फिलहाल इतना तय है कि कोलकाता से शुरू हुई यह कार्रवाई अब बिहार के लिए भी राजनीति का मुद्दा बनने जा रहा है.
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