दादा के खुशी से छलक पड़े आंसू
किर्गिस्तान में पांच साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब सोनिया चौधरी डॉक्टर बनकर गांव लौटीं, तो उनके दादा रूपाराम की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े. पूरे गांव ने भी गर्मजोशी से उनका स्वागत किया. स्वागत के बाद डॉ. सोनिया चौधरी ने गांव के प्राचीन बायोसा मंदिर में दर्शन किए. सोनिया की यह उपलब्धि आसपास के किसान परिवारों के लिए एक मिसाल बन सकती है, क्योंकि खेती करने वाले परिवार से एक बेटी का डॉक्टर बनना लोगों में खुशी का माहौल लेकर आया है.
माता-पिता की प्रेरणा से हासिल हुआ मुकाम
डॉ. सोनिया जणवा चौधरी ने अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता को दिया और कहा कि उनके माता-पिता की प्रेरणा से ही वह इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं. उन्होंने गांव के सभी किसानों से अपील की कि वे अपनी बेटियों को अधिक से अधिक पढ़ाएं और उन्हें सरकारी सेवाओं में भेजने का प्रयास करें. उनके अनुसार बेटियां हमेशा दो परिवारों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
दादा ने कहा- पूरे गांव को बेटी पर है गर्व
सोनिया के दादा रूपाराम की खुशी मानो फूली नहीं समा रही थी. उन्होंने कहा कि हमने अपनी पूरी जिंदगी खेती के काम में बिता दी. आज हमारी पोती डॉक्टर बनकर घर आई है, तो हमें बहुत खुशी हो रही है. हमारे परिवार की एक बेटी इस मुकाम तक पहुंचने में सफल हुई है. यह सिर्फ हमारे परिवार के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व की बात है.
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