पलामू टाइगर रिजर्व जैव विविधता से भरपूर
करीब 1142 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला पलामू टाइगर रिजर्व जैव विविधता से भरपूर है. इसी रिजर्व में पलामू जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर, पलामू किला के उत्तर दिशा में स्थित है कमलदह झील. इतिहास के अनुसार, राजा-महाराजाओं के समय में इस झील का उपयोग रानियों के स्नान स्थल के रूप में किया जाता था. वर्तमान में यह झील वन विभाग के संरक्षण में है और वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है.
झील की पहचान और भी खास
कमलदह झील सालभर जंगल के जीव-जंतुओं की प्यास बुझाती है. गौर, चीतल, हाथी, हिरण समेत कई वन्य प्राणी नियमित रूप से यहां पानी पीने आते हैं. हालांकि, सर्दियों का मौसम शुरू होते ही इस झील की पहचान और भी खास हो जाती है, जब दूर-दराज के देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां डेरा डालते हैं.
झील की पहचान और भी खास
कमलदह झील सालभर जंगल के जीव-जंतुओं की प्यास बुझाती है. गौर, चीतल, हाथी, हिरण समेत कई वन्य प्राणी नियमित रूप से यहां पानी पीने आते हैं. हालांकि, सर्दियों का मौसम शुरू होते ही इस झील की पहचान और भी खास हो जाती है, जब दूर-दराज के देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी यहां डेरा डालते हैं.
इस इलाके की समृद्ध जैव विविधता
पलामू टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने लोकल18 को बताया कि अब तक यहां 10 से 12 विलुप्तप्राय और दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों की पहचान की जा चुकी है. इनमें साइबेरियन पक्षी, स्लिंग डक, गीज, यूरेशियन गौरैया, नॉर्थन पिनटेल, रोजी पेलिकन और लेसर विसिल डक शामिल हैं. ये पक्षी मुख्य रूप से कमलदह झील और उसके आसपास के क्षेत्रों में देखे जाते हैं, जो इस इलाके की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाते हैं.
पर्यटकों के लिए एक प्रमुख हॉटस्पॉट
ठंड के दिनों में कमलदह झील पर्यटकों के लिए एक प्रमुख हॉटस्पॉट बन जाती है. पलामू किला देखने आने वाले सैलानी भी यहां जरूर पहुंचते हैं. झील के समीप बना वॉच टॉवर और लकड़ी का पुल पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है. पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा के लिए वनकर्मी हर समय तैनात रहते हैं.
इतिहास, प्रकृति और संरक्षण का जीवंत संगम
वन विभाग के अनुसार, इस वर्ष भी 15 दिसंबर से जनवरी के बीच प्रवासी पक्षियों का सर्वे किया जाएगा. इस दौरान यह आकलन किया जाएगा कि कौन-कौन से पक्षी इस बार आए हैं और कौन सी प्रजातियां पहली बार यहां देखी गई हैं. साथ ही पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं और योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं. आज कमलदह झील केवल एक जलाशय नहीं, बल्कि इतिहास, प्रकृति और संरक्षण का जीवंत संगम बन चुकी है, जो पलामू टाइगर रिजर्व की पहचान को और मजबूत करती है.
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