नालंदा विश्वविद्यालय में होगा आयोजन
प्राचीन ज्ञान की भूमि नालंदा में एक बार फिर बौद्धिक चिंतन की गूंज सुनाई देने वाली है। नालंदा विश्वविद्यालय 9-10 जनवरी को ‘हिंदी के संवर्धन और वैश्विक संवाद में विभिन्न संस्थाओं की भूमिका’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।
संगोष्ठी में देश-विदेश से 100 से अधिक विद्वानों की सहभागिता होगी, जिनमें वरिष्ठ अध्येता, विश्वविद्यालयों के कुलपति, हिन्दी सेवी संस्थाओं के पदाधिकारी, मीडिया जगत के संपादक और शोधार्थी शामिल हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ अपने शोधपरक विचार प्रस्तुत करेंगे।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
संगोष्ठी का उद्घाटन 9 जनवरी को सुबह 11 बजे सुषमा स्वराज सभागृह में होगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी विषय प्रवर्तन करेंगे। इस अवसर पर बिहार संग्रहालय के महानिदेशक एवं बिहार सरकार के पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह, अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार, पूर्व राज्यसभा सांसद एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक तरुण विजय जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।
दो दिनों में कुल सात अकादमिक सत्र और एक समापन सत्र आयोजित किए जाएंगे। विशेष बात यह है कि कुछ सत्रों में ऑनलाइन सहभागिता भी होगी, जिससे यह आयोजन वैश्विक स्वरूप ग्रहण करेगा।
पत्रकारिता से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक
संगोष्ठी का पहला सत्र ‘भाषायी नवाचार और सम्पादकीय दृष्टि’ पर केंद्रित होगा, जिसमें हिंदी पत्रकारिता और भाषा के समकालीन स्वरूप पर विमर्श होगा। इसकी अध्यक्षता तरुण विजय करेंगे।
दूसरे सत्र में ‘नालंदा और साहित्यिक संस्कृति’ पर चर्चा होगी, जिसमें लिस्बन विश्वविद्यालय के प्रो. शिव कुमार सिंह और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हीरा पॉल गांगनेगी जैसे विद्वान नालंदा की बौद्धिक परंपरा को समकालीन संदर्भ में रखेंगे।
तीसरा सत्र ‘भाषायी नवाचार: कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं तकनीकी अनुप्रयोग’, जिसकी अध्यक्षता (डिजिटल इंडिया परियोजना) CEO अमिताभ नाग करेंगे। हैदराबाद विश्वविद्यालय की प्रो. अंबा कुलकर्णी और आईआईटी कानपुर के प्रो. अनंत भट्टाचार्य जैसे तकनीकी विशेषज्ञ हिन्दी के डिजिटल भविष्य पर विचार प्रस्तुत करेंगे।
सबसे अधिक विद्वान कार्यक्रम में होंगे शामिल
वैश्विक मंच पर हिंदी की दावेदारी
संगोष्ठी का सबसे महत्वपूर्ण सत्र ‘संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के रूप में हिन्दी’ विषय पर होगा, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्रालय की संयुक्त सचिव अंजू रंजन करेंगी। राजदूत अभय कुमार और विश्व हिन्दी सचिवालय, मॉरीशस के पूर्व महासचिव प्रो. विनोद कुमार मिश्र जैसे अनुभवी वक्ता हिन्दी की वैश्विक संभावनाओं पर प्रकाश डालेंगे।
चौथे सत्र में हिन्दी की सांस्कृतिक और दार्शनिक भूमिका पर विचार होगा, जबकि दूसरे दिन उच्च शिक्षण संस्थानों और हिंदी सेवी संस्थाओं के योगदान पर केंद्रित दो सत्र होंगे।
10 जनवरी को आयोजित समापन सत्र में संगोष्ठी के समस्त विमर्श का सार प्रस्तुत किया जाएगा और हिन्दी भाषा के भविष्य तथा वैश्विक संवाद में उसकी भूमिका पर समेकित दृष्टिकोण विकसित किया जाएगा।
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