क्या है इस ट्रेनिंग की खासियत
इस ट्रेनिंग में टीचर्स को ये सिखाया जा रहा है कि बच्चों में मैथ और भाषा की बुनियादी समझ कैसे मजबूत करें. खासकर नंबर पहचानना, जोड़-घटाना, काउंटिंग स्किल्स और सिंपल प्रॉब्लम सॉल्विंग जैसी एक्टिविटीज को क्लास में कैसे शामिल किया जाए इस पर फोकस है. असल मकसद यही है कि सरकारी स्कूल के बच्चे भी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ आगे बढ़ें और पढ़ाई में किसी से पीछे ना रहें.
क्या है ट्रेनिंग का मकसद
Local18 से बात करते हुए टीचर दुष्यंत त्यागी जो कि जीपीएस घरोड़ा गांव में पढ़ाते हैं उन्होंने बताया कि ये ट्रेनिंग काफी क्वालिटी वाली है. इसमें टीचर्स को बच्चे पूरी तरह निपुण कैसे बनें इसकी तैयारी कराई जाती है. वो बताते हैं कि ट्रेनिंग में ये भी सिखाया जाता है कि बच्चों की लेवल के हिसाब से ग्रुप कैसे बनाएं, कुछ बच्चे कमजोर होते हैं कुछ एवरेज और कुछ फास्ट. सबको साथ लेकर कैसे आगे बढ़ाया जाए इसी पर ज़ोर है. दुष्यंत कहते हैं फोकस है कि क्लास में हर बच्चे तक पहुंच जाए, ताकि कोई पीछे न छूटे. खेल-खेल में पढ़ाने का तरीका बच्चों को बहुत पसंद आता है और इससे उनकी रुचि भी बढ़ती है. अभी ये ट्रेनिंग पहली, दूसरी और तीसरी क्लास के बच्चों को ध्यान में रखकर हो रही है, लेकिन इसका असर बाकी क्लासेस में भी दिखता है.
सभी बच्चों पर फोकस करना है उद्देश्य
अध्यापिका निशा कुमारी जो जीपीएस सेक्टर 7 फरीदाबाद में पढ़ाती हैं ने बताया कि पहले ये ट्रेनिंग जून की छुट्टियों में छह दिन के लिए होती थी अब सत्र के दौरान ही कराई जा रही है. उन्होंने कहा कल हिंदी की ट्रेनिंग थी आज मैथ्स की है. निपुण हरियाणा मिशन चाहता है कि हर बच्चा अपनी क्लास के हिसाब से पूरी तरह सक्षम हो जाए. उन्होंने ये भी बताया कि हाल ही में विभाग ने जो असेसमेंट कराया था उसका रिजल्ट काफी अच्छा रहा है. उसी को देखकर अब ये ट्रेनिंग हो रही है, ताकि बच्चों की लर्निंग और बेहतर हो.
वो कहती हैं बच्चों को तीन ग्रुप्स में बांटना है और टीचर को ये सीखना है कि सबको साथ लेकर कैसे पढ़ाया जाए. आठ दिन का ये प्रोग्राम बच्चों को उनकी क्लास के हिसाब से मजबूत बनाने पर फोकस्ड है जिससे उनका रिजल्ट भी बेहतर आएगा और पढ़ाई में दिलचस्पी भी बढ़ेगी.
टीचर बबीता ने बताया कि ट्रेनिंग में ये सिखाया जा रहा है कि जो बच्चे तेज हैं उन्हें सपोर्टिव बच्चों के साथ मिलाकर पढ़ाएं, ताकि सब एक जैसे आगे बढ़ें और कोई पीछे ना रह जाए.
साल 2022 से चल रही है एफएलएन ट्रेनिंग
ब्लॉक रिसोर्स पर्सन कुलदीप बताते हैं कि एफएलएन ट्रेनिंग 2022 से चल रही है. उन्होंने कहा जून वाली ट्रेनिंग में टीचर्स को एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग के तरीके बताए गए थे जिससे बच्चे पढ़ने-लिखने और गणना में मजबूत हों. दूसरी और तीसरी क्लास के लिए कुछ टारगेट्स भी सेट हैं. जैसे दूसरी क्लास का बच्चा एक मिनट में 45 शब्द समझ के साथ पढ़ सके ये टारगेट है.
कैसे होती है पढ़ाई
उन्होंने आगे बताया कि बच्चों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है एक्सीलेंट, मीडियम और सपोर्टेड. सपोर्टेड में वो आते हैं जिन्हें टीचर की ज्यादा मदद चाहिए. अब जो ट्रेंनिंग हो रही है उसका मकसद है कि मीडियम वाले बच्चे एक्सीलेंट बनें और सपोर्टेड वाले मीडियम में आ जाएं. कुलदीप कहते हैं हम बच्चों को बाल गीत और एक्टिविटीज के जरिए पढ़ा रहे हैं. इससे उनमें काफी बदलाव आया है. वर्कबुक भी मिल गई है जिससे टेस्ट लिए जा रहे हैं. रिजल्ट लगातार सुधर रहा है.
प्राइवेट स्कूलों के दे रहे हैं टक्कर
कुलदीप ने ये भी जोड़ा कि निपुण भारत मिशन में पूरे देश में हिंदी और मैथ्स पर फोकस है, लेकिन हरियाणा में तीसरा सब्जेक्ट अंग्रेजी भी शामिल किया गया है. इसलिए यहां तीनों सब्जेक्ट्स पर जोर है. उनका कहना था अब हमारे सरकारी स्कूलों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल्स के बच्चों को टक्कर दे रहे हैं. आगे चलकर ये उनसे आगे भी निकलेंगे. बच्चों के रिजल्ट में बदलाव साफ दिख रहा है.
कुल मिलाकर ये ट्रेनिंग कोई फॉर्मेलिटी नहीं है. ये बच्चों की बुनियाद मजबूत करने की बड़ी कोशिश है. अगर ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम लगातार चलते रहे और स्कूलों में एक्टिविटी-बेस्ड लर्निंग का माहौल बना रहा तो सरकारी स्कूलों के बच्चे भी आत्मविश्वास से भरपूर होंगे और पिछड़ने वाला पुराना टैग पीछे छूट जाएगा.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.