नागौर जिले में घुमंतु अनुसूचित जाति की महिला मजदूरों पर जानलेवा हमले के विरोध में सोमवार को परिजनों के साथ मजदूर और सामाजिक संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कुचेरा थाना क्षेत्र के ग्राम निम्बी चारणान में महिला मजदूर पर हमले के मामले में जांच को नाकाफी बताया और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। घटना के विरोध में समाज के प्रतिनिधियों का कुचेरा में पिछले तीन दिनों से धरना जारी है। हालांकि मामले में जिला प्रशासन और पुलिस ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और जांच अधिकारी को भी बदल दिया गया। मांग की। प्रदर्शनकारियों ने एसपी को सौंपे गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि बीते 3 फरवरी को नशे में धुत हमलावरों ने संगठित होकर महिला मजदूरों पर लाठियों और धारदार हथियारों से हमला किया। इस हमले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। उसका नागौर के राजकीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। आरोप है कि हमलावरों ने महिलाओं के साथ न केवल मारपीट की, बल्कि जातिसूचक शब्दों से अपमानित भी किया। पीड़ितों का कहना है- पुलिस और प्रशासन के उच्च अधिकारियों को बताने के बाद अब तक दोषियों के खिलाफ जान से मारने के प्रयास और संगठित अपराध जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन करेंगे। न्याय न मिलने की स्थिति में विधानसभा के समक्ष महापड़ाव डालेंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी नागौर पुलिस और जिला प्रशासन की होगी। मामले में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से भी कार्रवाई की मांग की है। कार्यवाहक जिला कलेक्टर चम्पालाल जिनगर का कहना है कि मामले में ग्रामीणों ने ज्ञापन दिया है, इसकी जानकारी उच्चाधिकारीयों को दी गई है। साथ ही उनकी तरफ से जांच बदलवाने कि मांग कि गई है, जिसके लिए एसपी को पत्र लिखा गया है। मामले में ASP आशाराम चौधरी ने बताया कि ग्रामीण वर्तमान जांच से संतुष्ट नहीं थे, उनकी मांग पर अब जांच सीओ मेड़ता को सौंप दी गई है। इस मामले में अब तक एक गिरफ्तारी हुई है और अन्य लोगों के बारे में जांच चल रही है।
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