Mustard Crop Protection Tips:सरसों की खेती के लिए जनवरी का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय फसल में फूल आना, फलियां बनना और दाने भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर इस दौरान सही देखभाल की जाए, तो उपज और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी संभव है.
सरसों की खेती के लिए जनवरी का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इस समय फसल में फूल आना, फलियां बनना और दाने भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. अगर इस दौरान सही देखभाल की जाए, तो उपज और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी संभव है.

पलामू जिले के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि विशेषज्ञ डॉ० अखिलेश शाह ने लोकल18 को बताया कि जनवरी में सरसों की फसल को एक हल्की सिंचाई की आवश्यकता होती है. खासकर फूल आने और फलियां बनने की अवस्था में नमी बहुत जरूरी होती है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि अधिक नमी से जड़ सड़न और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है.

आगे कहा कि इस समय फसल को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा की जरूरत होती है. यदि खेत में कमजोरी दिखे, तो अनुशंसित मात्रा में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग करें, जिससे पौधों की बढ़वार और दाने भरने की क्षमता बढ़ती है.
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आगे कहा कि जनवरी में सरसों में सल्फर और बोरॉन की कमी आमतौर पर देखी जाती है. सल्फर से तेल की मात्रा बढ़ती है, जबकि बोरॉन से फलियों का विकास बेहतर होता है. जरूरत पड़ने पर इनका स्प्रे या मिट्टी में प्रयोग करें.

उन्होंने कहा कि इस महीने माहू (एफिड), आरी मक्खी और सफेद रतुआ जैसे रोगों का प्रकोप बढ़ सकता है. समय-समय पर खेत का निरीक्षण करें और लक्षण दिखने पर तुरंत उचित कीटनाशक या रोगनाशक का छिड़काव करें.

अगर खेत में खरपतवार नजर आ रहे हों, तो हल्की निराई-गुड़ाई जरूर करें. इससे मिट्टी में हवा का संचार होता है और पौधों को पोषक तत्व बेहतर तरीके से मिलते हैं.

तेज ठंड या पाले की संभावना हो, तो फसल की सुरक्षा के उपाय करें. हल्की सिंचाई या धुआं करने से पाले का असर कम किया जा सकता है, जिससे फूल और फलियां सुरक्षित रहती हैं.

आगे कहा कि अगर जनवरी महीने में सिंचाई, पोषण, कीट नियंत्रण और फसल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो सरसों की फसल से बेहतर उपज और अधिक मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है.
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