प्रदेश में इन दिनों विभिन्न हिंदू संगठनों की ओर से विराट हिंदू सम्मेलन के आयोजन हो रहे हैं। इसी बीच डूंगरपुर जिले के डूंका गांव में एक छात्रावास में विराट हिंदू सम्मेलन के कार्यक्रम को लेकर सांसद राजकुमार रोत ने सवाल उठाए हैं।
वागड़ में गांवों और कस्बों में ये सम्मेलन हो रहे हैं। इन सम्मेलनों में सभी जातियों के लोग सम्मिलित हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि विराट हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य समाज में धार्मिक चेतना जागृत करना तथा संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करना है। ऐसा ही सम्मेलन डूंगरपुर जिले के डूंका गांव में हुआ है, जिसका प्रचार पत्रक सांसद राजकुमार रोत ने एक्स पर पोस्ट किया है।
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सांसद राजकुमार रोत ने एक्स पर पोस्ट किया है कि दक्षिणी राजस्थान के एक स्कूल में स्थानीय बोली भाषा में ‘भील प्रदेश’ गीत गाए जाने पर पूरे शिक्षा विभाग में खलबली मच गई थी। विभाग के अधिकारियों ने तुरंत गाइड लाइन का हवाला देकर स्थानीय कर्मचारियों को निलंबित कर दिया था लेकिन आज उन्हीं स्कूलों और छात्रावासों में विराट हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। ये किस गाइड लाइन के तहत हो रहा है? क्या नियम केवल कुछ आवाजों को दबाने के लिए हैं या फिर गाइड लाइन सब पर समान रूप से लागू होनी चाहिए?
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पूर्व एक सरकारी स्कूल में बच्चों ने प्रार्थना सभा में भील प्रदेश के गीत की प्रस्तुति दी गई थी। इस पर हिंदूवादी संगठनों के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने आपत्ति जताई थी और कुछ कार्मिक निलंबित किए गए थे। अब सरकारी परिसर में हिंदू सम्मेलन पर सांसद ने आपत्ति की है। हालांकि उक्त सम्मेलन हो चुका है लेकिन सांसद की आपत्ति को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा आम हो रही है।
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