पंजाब के मोहाली में हत्या से जुडे़ मामले में जिला कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी में पंकज शर्मा निवासी गांव बेला थाना नादौन जिला हमीरपुर हिमाचल प्रदेश और दलजीत कौर निवासी कपूरथला शामिल है। उन्हें कोर्ट ने आईपीसी की धारा 302, 364, 201 और 120-बी के तहत सजा सुनाई है। मामले की सुनवाई 4 साल, 3 महीने और 8 दिन चली। मामला 2021 का है, जब 13 फरवरी को मोहाली के मटौर थाने में FIR दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पता चला कि 10-11 फरवरी 2021 की रात को आरोपियों ने सुनील कुमार को बस्सी पठाना स्थित दलजीत कौर के घर पर बुलाया था। वहां सुनील को शराब पिलाकर बेहोश किया गया, फिर गला घोंटकर हत्या कर दी गई। लाश को भाखड़ा नहर में फेंक दिया गया और सुनील की कार को कजौली ब्रिज के पास छोड़ दिया गया। कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया। नहर से मिला था युवक का शव सुनील कुमार का शव नहर से बरामद हुआ, जिसके हाथ बंधे हुए थे और मुंह पर टेप व रूमाल लिपटा था। गवाहों के बयान, जिसमें एक गवाह ने आरोपियों को सुनील की कार के पास देखा था। सुनील द्वारा लिखी गई एक माफी की चिट्ठी, जो दलजीत की एक्टिवा से बरामद हुई, जिसमें आरोपियों द्वारा ब्लैकमेलिंग का जिक्र था। सीडीआर रिकॉर्ड से आरोपियों और पीड़ित की लोकेशन एक ही जगह पर पाई गई। पुलिस ने यह बताई थी हत्या की वजह
पुलिस ने बताया कि सुनील कुमार कन्फेक्शनरी की दुकान करता था। जबकि आरोपी पंकज और दलजीत कौर मार्केटिंग का काम करते थे। वह सुनील को भी सामान देते थे। दलजीत के पति की मौत हो चुकी है। साथ में काम करने के दौरान दलजीत और पंकज में प्रेम संबंध हो गए। इसकी जानकारी सुनील को थी। आरोप है कि सुनील के पास कुछ तस्वीरें थीं, जिनके दम पर उन्हें ब्लैकमेल करता था। इसके अलावा वह पंकज के पैसे भी नहीं लौटा रहा था। उससे छुटकारा पाने के लिए दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची। रेयर ऑफ रेयर” नहीं माना जज हरदीप सिंह ने कहा कि यह हत्या का स्पष्ट मामला है, जहां आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत अपराध किया। कोर्ट ने इसे “रेयर ऑफ रेयर” मामला न मानते हुए मौत की सजा की बजाय आजीवन कारावास दिया। दोनों आरोपियों पर कुल 2.80 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जिसमें से 2.50 लाख रुपए पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में दिए जाएंगे। पीड़ित सुनील कुमार मोहाली के मटौर गांव में किराना की दुकान चलाते थे। उनके भाई परवीन कुमार और बेटे मयंक गोयल ने गवाही दी कि सुनील का आरोपियों के साथ कारोबारी और निजी विवाद था। परिवार ने फैसले का स्वागत किया है।
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