Bundi Rajasthan News : रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में मध्यप्रदेश के पेंच से लाई गई बाघिन ने आते ही सबको चौंका दिया है. नए माहौल में ढलते हुए बाघिन ने तीसरे ही दिन सफल शिकार कर लिया. वन विभाग इसे बाघिन के अच्छे स्वास्थ्य, अनुकूलन क्षमता और इंटर-स्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन की बड़ी सफलता मान रहा है.
वन विभाग की ओर से सॉफ्ट एंक्लोजर के भीतर बाघिन की गतिविधियों का मूवमेंट वीडियो भी जारी किया गया है. अधिकारियों के अनुसार बाघिन पूरी तरह स्वस्थ है और उसका व्यवहार सामान्य पाया गया है. सीसीएफ एवं फील्ड डायरेक्टर सुगनाराम जाट ने बताया कि तीन वर्षीय बाघिन पीएन-224 को 22 दिसंबर को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया था. नए क्षेत्र में इतनी जल्दी शिकार कर लेना इस बात का प्रमाण है कि बाघिन ने यहां के वातावरण को स्वीकार कर लिया है.
रामगढ़ विषधारी में नई बाघिन, जेनेटिक ताकत बढ़ेगी
वन विभाग के अनुसार इससे पहले रणथंभौर से लाई गई एक बाघ को शिकार करने में करीब एक सप्ताह का समय लगा था, जबकि पेंच से लाई गई बाघिन ने तीसरे दिन ही शिकार कर लिया. फिलहाल बाघिन पर कैमरा ट्रैप और फील्ड स्टाफ के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि उसकी गतिविधियों, स्वास्थ्य और मूवमेंट पर नजर बनी रहे.
एमपी से आई बाघिन, राजस्थान में नया इतिहास
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में यह ट्रांसलोकेशन राजस्थान में बाघों के जेनेटिक बेस को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व—रणथंभौर, सरिस्का, मुकंदरा और रामगढ़ विषधारी—में अब तक एक ही फैमिली लाइन के बाघ पाए जा रहे थे. इससे जीन पूल सीमित हो रहा था, जो भविष्य में बाघों के स्वास्थ्य और संख्या के लिए चुनौती बन सकता था. इसी कारण दूसरे राज्य से बाघिन लाकर क्रॉस ब्रीडिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया. देश में वर्तमान में कुल 58 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें से 6 राजस्थान में स्थित हैं. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में किया गया यह ट्रांसलोकेशन देश का पहला इंटर-स्टेट टाइगर ट्रांसलोकेशन माना जा रहा है. इससे पहले राज्य के भीतर ही बाघों को एक रिजर्व से दूसरे रिजर्व में शिफ्ट किया जाता रहा है.
क्रॉस ब्रीडिंग से मजबूत होगा राजस्थान का टाइगर फ्यूचर
फील्ड डायरेक्टर एवं मुख्य वन संरक्षक सुगनाराम जाट ने बताया कि मुकंदरा और बूंदी के रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में मौजूद सभी बाघ-बाघिन रणथंभौर से सरिस्का, मुकंदरा और रामगढ़ में स्थानांतरित किए गए थे और ये सभी एक ही फैमिली लाइन के हैं. इसी वजह से मध्यप्रदेश से बाघिन लाई गई है, ताकि क्रॉस ब्रीडिंग के जरिए जीन पूल मजबूत किया जा सके और आने वाली पीढ़ी के बाघ ज्यादा स्वस्थ, मजबूत और दीर्घायु बन सकें. वन विभाग को उम्मीद है कि इस प्रयास से न केवल रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि पूरे राजस्थान में टाइगर कंजर्वेशन को भी नई मजबूती मिलेगी.
About the Author
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at News18 India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.