छात्रा को न्याय दिलाने के लिए प्रदर्शन करते. कम्यूनिस्ट पार्टी के सदस्य
करनाल के उपलाना गांव की एक छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत को लेकर गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मामले को लेकर शुक्रवार को जिला सचिवालय के बाहर जोरदार रोष प्रदर्शन किया गया। परिजनों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए निष
डेढ़ साल पहले निजी स्कूल की छात्रा स्कूल से आई तो तबीयत बिगड़ गई। उसको अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। मामला तब बढ़ा छात्रा के बस्ते से सुसाइड नोट मिला। इसमें उसने स्कूल के प्रिंसिपल व स्टाफ पर प्रताड़ना के आरोप लगाए थे।लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
अधिकारी को ज्ञापन सौंपते संगठन के लोग
जानिए– छात्रा की मौत की कहानी, परिजनों के आरोप
- मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना: मृतका की मां मीना और पिता जोगिंद्र ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी निक्की कश्यप एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ती थी। स्कूल में प्रधानाचार्य तरसेम और अन्य स्टाफ सदस्यों की लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान थी। इसी प्रताड़ना के चलते उसने 8 अगस्त 2024 को आत्महत्या जैसा कदम उठाया।
- घर आने पर बिगड़ी तबीयत: मां मीना ने बताया कि उसकी बेटी स्कूल से घर आई थी तो कहा कि उसे चक्कर आ रहे है। मैंने उसकी आंखों में पानी भी मारा था, लेकिन बात नही बनी। उसकी तबियत बिगड़ गई। तुरंत असंध के एक प्राइवेट अस्पताल में लेकर पहुंची। वहां डॉक्टरों ने छात्रा को बीपी की प्रॉब्लम बता दी। उसका बीपी जीरो हो चुका था, उसे करनाल रेफर कर दिया, वे एंबुलेंस से उसे करनाल लेकर गए लेकिन रास्ते में ही जुंडला गांव के पास छात्रा ने दम तोड़ दिया था
- 12 दिन बाद बस्ते से मिला प्रेसनोट:मां का आराेप है कि उनकी बेटी ने क्या कुछ खाया था क्या नहीं, इसका कुछ पता नहीं है। लेकिन ज्यादा समझ न हो पाने के कारण हमने पोस्टमार्टम नहीं करवाया था। मां ने बताया कि मौत के कुछ दिन बाद 12 अगस्त को निक्की के स्कूल बैग से एक सुसाइड नोट भी मिला था। इसमें प्रधानाचार्य तरसेम सिंह और स्कूल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिसके बाद असंध थाने में शिकायत दी गई थी और इस मामले में तीन लोगों को नामजद किया गया था।

छात्रा, जिसकी मौत हो गई
इस लापरवाही का क्या जवाब डेढ़ साल बाद भी गिरफ्तारी नहीं, बढ़ा जनाक्रोश
- इस मामले में असंध थाना में नामजद एफआईआर नंबर 573 दर्ज की गई थी, लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। पीड़ित परिवार, जो मजदूर वर्ग से है, लंबे समय से न्याय की आस में मानसिक रूप से टूट चुका है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह प्रशासनिक उदासीनता और संरक्षण का स्पष्ट उदाहरण है।
- प्रदर्शनकारियों ने प्रधानाचार्य और अन्य आरोपी स्टाफ सदस्यों की तत्काल गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा, मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और परिवार के अन्य बच्चों की शिक्षा व सुरक्षा के लिए सरकारी सहायता की मांग की। साथ ही स्कूलों में बच्चों के उत्पीड़न को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश लागू करने पर जोर दिया गया।

बस्ते से मिला सुसाइड नोट
फॉरेंसिक रिपोर्ट और नार्को टेस्ट आरोपियों के खिलाफ
- प्रदर्शनकारियों ने बताया कि मधुबन लैब की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में सुसाइड नोट को निक्की की मूल हस्तलिपि में लिखा हुआ प्रमाणित किया गया है। इसके अलावा प्रधानाचार्य तरसेम का दिल्ली में कराया गया नार्को टेस्ट भी उनके खिलाफ अहम साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इसके बावजूद आरोपियों की अब तक गिरफ्तारी न होना प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े करता है।
कम्युनिस्ट पार्टी माले की अगुवाई में सौंपा गया ज्ञापन
कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन की जिला इकाई करनाल की ओर से गांव उपलाना निवासी साढ़े सोलह वर्षीय छात्रा निक्की कश्यप की मौत के मामले में जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। पार्टी नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज से जुड़ा सवाल है।
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