बर्फबारी के बाद जमी कमरुनाग झील।
मंडी जिले के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल देव कमरुनाग में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। देर रात मनाली के कोकसर सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बर्फबारी का असर मंडी जिले तक देखा गया, जहां देव कमरुनाग की पवित्र झील बर्फ की मोटी परत से पूरी तरह जम
करीब चार माह के लंबे अंतराल के बाद हुई इस बर्फबारी से मौसम ने करवट ली है। यह बर्फबारी किसानों, बागवानों, पर्यटकों और स्थानीय देव समाज के लिए खुशी लेकर आई है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, देव कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिरों के कपाट बंद होते ही क्षेत्र में बर्फबारी का दौर शुरू हो जाता है। इस बार भी यह परंपरा दोहराई गई है।
बर्फबारी के बाद जमी कमरुनाग झील।
कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिरों के कपाट बंद
बर्फबारी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए हैं। मंदिर परिसरों में मौजूद दुकानदारों और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों पर लौटने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने बताया कि भारी बर्फबारी की स्थिति में आवाजाही बाधित हो सकती है, इसलिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जा रही हैं।
किसानों और बागवानों के लिए यह बर्फबारी किसी वरदान से कम नहीं है। क्षेत्र के किसानों उत्तम चंद, राजीव ठाकुर, मुरारी लाल, दीपक, यशवंत, चंद्रमणि, नाग, यशु, तोम चंद, भीम सिंह और वेद प्रकाश ने बताया कि बारिश और बर्फबारी फसलों के लिए बेहद लाभकारी होती है, खासकर सेब की फसल के लिए यह समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

बर्फबारी के बाद जमी कमरुनाग झील।
बर्फबारी से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि), विद्युत विभाग और आईपीएच विभाग ने संभावित बर्फबारी से निपटने के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सभी विभागों के उच्च अधिकारियों ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए है।
देवता के गूर देवी सिंह ने कमरुनाग में बर्फबारी की पुष्टि करते हुए बताया कि बर्फ गिरने से देव कमरूनाग की पवित्र झील पूरी तरह जम गई है। उन्होंने इसे देव कृपा का संकेत बताया। बर्फ से ढके पहाड़, जमी हुई झील और ठंडी हवाएं इन दिनों कमरुनाग को किसी स्वर्गीय दृश्य जैसा बना रही हैं।
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