करौली में चल रही विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि नियमों की अनदेखी कर बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की गोपनीय कोशिश की जा रही है। इस संबंध में पूर्व मंत्री रमेश चंद मीणा के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला निर्वाचन अधिकारी नीलाभ सक्सेना को ज्ञापन सौंपकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 12 दिसंबर 2025 को प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन किया गया था। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि 12 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक निर्धारित थी। इलेक्ट्रॉल मैनुअल 2023 के पैरा 11.3.2 (2) के अनुसार, बल्क आवेदन स्वीकार नहीं किए जा सकते हैं। प्रत्येक मतदाता को केवल एक ही फॉर्म प्रस्तुत करना होता है, जिसमें पूर्ण विवरण, मोबाइल नंबर, साक्ष्य और अंडरटेकिंग अनिवार्य है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि करौली जिले के विभिन्न एसडीएम कार्यालयों में एक विशेष राजनीतिक दल से जुड़े कार्यकर्ताओं द्वारा नियमों के विपरीत एक ही दिन में सैकड़ों से हजारों की संख्या में फॉर्म-7 और फॉर्म-6 बल्क में जमा कराए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में भाजपा से जुड़े विधायक, प्रत्याशी और पदाधिकारी/कार्यकर्ता व्यक्तिगत रूप से 200 से 300 फॉर्म-7 भरकर मतदाताओं के नाम कटवाने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, जिले में 20 से 30 हजार वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की आशंका है। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 5 से 6 हजार फॉर्म-7 संबंधित उपखंड अधिकारियों के पास लंबित बताए गए हैं। साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया है कि ब्लॉक लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव बनाकर नाम विलोपित कराए जा रहे हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि बल्क में भरे गए फॉर्म-6, 7 और 8 पर कोई संज्ञान न लिया जाए। इसके अलावा, ऐसे सभी फॉर्मों की प्रतियां पार्टी को उपलब्ध कराई जाएं और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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