जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने कैदियों के मनमाने स्थानांतरण पर सख्त रुख अपनाते हुए एक अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने बिना ठोस कारण किसी कैदी को 800 से 1000 किलोमीटर दूर दूसरी जेल में भेजने को असंवैधानिक करार दिया है. जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने गंगानगर जेल से डूंगरपुर जेल भेजे गए एक कैदी के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी कैदी को इतनी लंबी दूरी पर भेजना, जिससे उसके परिजनों को उससे मिलने में अत्यधिक कठिनाई हो, यह न केवल अमानवीय है बल्कि संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है.
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि जेल प्रशासन द्वारा कैदी के स्थानांतरण के लिए कोई ठोस सुरक्षा या प्रशासनिक कारण प्रस्तुत नहीं किया गया. सिर्फ प्रशासनिक सुविधा के नाम पर इस तरह का आदेश कानून की दृष्टि में टिकाऊ नहीं हो सकता. कोर्ट ने कहा कि कैदी के अधिकारों की अनदेखी कर लिया गया फैसला न्यायसंगत नहीं है. मामले में याचिकाकर्ता कैदी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दलील दी थी कि उसे बिना किसी ठोस वजह के गंगानगर से
डूंगरपुर भेज दिया गया, जिससे उसके परिवार को उससे मिलने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का सफर करना पड़ रहा है. कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कैदी को बड़ी राहत दी.
देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार है जोधपुर सेंट्रल जेल
जोधपुर सेंट्रल जेल में देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार होने के चलते बड़े स्तर पर कैदियों की शिफ्टिंग की गई है. प्रशासन ने प्रदेश की विभिन्न जेलों से 220 हार्डकोर बंदियों को
जोधपुर सेंट्रल जेल स्थानांतरित किया है. इस शिफ्टिंग में 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट केस और टाडा एक्ट से जुड़े दोषी कैदी भी शामिल हैं. इनमें आतंकी अब्दुल करीम टुंडा के करीबी बताए जा रहे हमीदुद्दीन समेत तीन टाडा बंदी प्रमुख रूप से शामिल हैं.
जोधपुर सेंट्रल जेल लाया गया हाई-रिस्क कैदी
जानकारी के अनुसार, जयपुर जेल से 62, अजमेर जेल से 63 और उदयपुर जेल से 95 कैदियों को जोधपुर सेंट्रल जेल लाया गया है. इन सभी को हाई-रिस्क कैदी माना जा रहा है. कैदियों की शिफ्टिंग के बाद जोधपुर सेंट्रल जेल में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है. अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है. जेल प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की चूक से बचने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है.
स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है सेंट्रल जेल
हालांकि, बड़ी संख्या में हार्डकोर कैदियों की शिफ्टिंग के चलते जेल स्टॉफ पर काम का दबाव भी बढ़ गया है. स्टाफ की कमी के बीच प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है. सूत्रों के मुताबिक, जोधपुर जेल प्रशासन ने मुख्यालय से अतिरिक्त स्टॉफ की मांग करने की तैयारी भी शुरू कर दी है, ताकि सुरक्षा और व्यवस्था में कोई कमी न रह जाए. अधिकारियों का कहना है कि यह शिफ्टिंग प्रदेश की सभी जेलों में कैदियों की संख्या का समान औसत बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है.