झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे। जहां उनकी उपस्थिति में संथाल समाज के पारंपरिक ‘खुठ कटी’ रीति से नाइके (पुजारी) का चयन किया गया। मुख्यमंत्री दोपहर 1:20 बजे पहुंचे। 2 बजे आमसभा स्थल पहुंचकर नाइके (पुजारी) चयन प्रक्रिया में शामिल रहे। सोहन सोरेन के त्यागपत्र के बाद आयोजित आमसभा में सर्वसम्मति से चेतन टुडू को नाइके बाबा चुना गया। पारंपरिक हथियार और पगड़ी पहनाकर उनका अभिनंदन किया गया। इसके बाद विधिवत कार्यभार सौंपा गया। उन्हें ग्राम देवताओं की पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन की जिम्मेदारी दी गई। परंपरा और शासन का सशक्त संगम संथाल समाज में नाइके का पद धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्राम देवताओं की पूजा, फसल एवं वर्षा से जुड़े अनुष्ठानों का संचालन व सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों का नेतृत्व नाइके द्वारा किया जाता है। वहीं पूर्व से कार्यरत पारंपरिक पदाधिकारियों में मांझी बाबा हेमंत सोरेन, प्राणिक बाबा बिरजू सोरेन, भादो राम बाबा सुखदेव किस्कू, कुड़म नाइके छुट्टू बेसरा तथा जोग मांझी विश्वनाथ बेसरा शामिल रहे। मौके पर मुखिया जीतलाल टुडू, पूर्व मुखिया अनुज कुमार, कपिल महतो, हरण सिंह मुंडा, आलम अंसारी, बरतू करमाली, सुनील करमाली, फखरुद्दीन अंसारी, सतीश मुर्मू मुखिया सूतरी पंचायत सहित कई लोगों उपस्थित थे।
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