दिव्यांग बनें आत्मनिर्भर
यह योजना सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत चलाई जाती है और इसके कार्यान्वयन में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (ALIMCO) की प्रमुख भूमिका है. योजना का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को ऐसे उपकरण प्रदान करना है, जो उनकी शारीरिक चुनौतियों को कम करें और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनने में मदद करें.
जरूरत के हिसाब से दिए जाते हैं उपकरण
योजना के तहत लाभार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार अलग प्रकार के सहायक उपकरण दिए जाते हैं. इनमें व्हीलचेयर, मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, बैसाखी, वॉकर, कृत्रिम हाथ और पैर, श्रवण यंत्र, दृष्टि सहायक उपकरण तथा कुछ मामलों में डिजिटल उपकरण भी शामिल हो सकते हैं. इन साधनों से दिव्यांगजन न केवल अपनी आवाजाही और दैनिक कामकाज में सक्षम बनते हैं, बल्कि छोटे व्यवसाय, सेवा कार्य या घर से किए जाने वाले रोजगार से भी जुड़ सकते हैं.
कौन ले सकता है इस योजना का लाभ
इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है तथा कम से कम 40 प्रतिशत दिव्यांगता प्रमाणित होनी चाहिए. आय सीमा भी निर्धारित है, इसलिए आय प्रमाण पत्र जरूरी होता है. आवेदन के समय जिन दस्तावेजों की आवश्यकता पड़ती है, उनमें यूडीआईडी कार्ड या मान्य दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र, पासपोर्ट आकार की फोटो और आवश्यकता होने पर निवास प्रमाण शामिल हैं.
यहां कर सकते हैं संपर्क
जमशेदपुर के दिव्यांगजन इस योजना का लाभ लेने के लिए सबल केंद्र, जो जीएनएससी कार्यालय के समीप, साकची, जमशेदपुर में स्थित है, वहां संपर्क कर सकते हैं. यहां लाभार्थियों का पंजीकरण किया जाता है, दस्तावेजों की जांच होती है और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद जरूरत के अनुसार उपकरण स्वीकृत किए जाते हैं. समय-समय पर शिविरों के माध्यम से भी उपकरण वितरण की व्यवस्था की जाती है.
जीवन को दे सकते हैं नई दिशा
एडिप योजना दिव्यांगजनों के लिए केवल सहायता कार्यक्रम नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. सही जानकारी, आवश्यक दस्तावेज और समय पर संपर्क के माध्यम से पात्र व्यक्ति इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन को नई दिशा दे सकते हैं.
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