Jaipur Art Exhibition : जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में द आर्ट ऑफ इंडिया प्रदर्शनी में यूसुफ और अंकित पटेल की अनोखी सिलाई मशीनें कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. इस प्रदर्शनी में खासतौर पर दो अनोखी सिलाई मशीनें सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. उनकी डिजाइन और कार्य करने की क्षमता बेहद खास है. कलाकारों ने अलग अलग धातुओं से कई इंस्टालेशन तैयार किए हैं, जिनमें प्राचीन कला को सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया गया है.
इस प्रदर्शनी में खासतौर पर दो अनोखी सिलाई मशीनें सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं. उनकी डिजाइन और कार्य करने की क्षमता बेहद खास है. कलाकारों ने अलग अलग धातुओं से कई इंस्टालेशन तैयार किए हैं, जिनमें प्राचीन कला को सुंदरता के साथ प्रस्तुत किया गया है. पेंटिंग और स्कल्पचर के अलावा धातुओं से बनी ये आर्ट डिजाइन कलाकारों और आम दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं.
बेहतरीन डिजाइन से सजी खास सिलाई मशीन
प्रदर्शनी में सजी एक खास सिलाई मशीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि उस पर लोगों की निगाहें ठहर जाती हैं. इस मशीन को कलाकार यूसुफ ने तैयार किया है. यह सिलाई मशीन मनुष्य और मशीन के रिश्ते को दर्शाती है. इसकी डिजाइन में यक्षिणी शैली, तकनीक और आध्यात्मिकता का संतुलन दिखाई देता है. कलाकार ने लोहे के छोटे छोटे नट बोल्ट और विभिन्न मिश्रित धातुओं का उपयोग करते हुए इसे 20.47 x 20.47 इंच के आकार में तैयार किया है. यह रचना अन्य कृतियों के बीच अपनी अनूठी पहचान बनाती है. मनुष्य और मशीन के संबंध को दर्शाती यह सिलाई मशीन आधुनिक मानव की दुविधा और मशीनों के साथ सहअस्तित्व के भाव को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है. यह मशीन अपने पंख फैलाकर उड़ान भरती हुई मूर्ति जैसी प्रतीत होती है.
वर्षों पुरानी पैडल तकनीक पर आधारित मशीन
प्रदर्शनी में एक और खास आकर्षण कलाकार अंकित पटेल द्वारा प्रस्तुत व्हीलर एंड विल्सन की सिलाई मशीन है. यह लगभग 100 वर्ष पुरानी मशीन है, जिसे दो अलग अलग पैडल पर पैर रखकर चलाया जाता है. दोनों पैडल एक छड़ से जुड़े हुए हैं. मशीन का आकार लगभग 30 x 24 x 36 इंच है. इसके ऊपर कपड़ा सिलने का बोर्ड हारमोनियम की तरह दिखाई देता है. यह दर्शाती है कि किस प्रकार एक साधारण कपड़ा सिलाई की प्रक्रिया से आकार लेता है, जैसे हारमोनियम की ध्वनियां मिलकर एक राग का निर्माण करती हैं. प्रदर्शनी में सजी ये दोनों मशीनें दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.
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नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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