प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल में मुफ्त होने वाली एमआरआई- सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए दलाल पैसे वसूल रहे हैं। न डॉक्टर के पास जाने की जरूरत न लाइन में लगने का झंझट। दलालों को मुंहमांगा पैसा दो, आधे घंटे में नंबर आ जाएगा। पैसे न देने वाले आम मरीजो
दलालों के इस खेल को एक्सपोज करने के लिए भास्कर के दो रिपोर्टर मरीज बनकर करीब 15 दिन तक SMS अस्पताल घूमे। चाय की दुकान से लेकर पार्किंग में बैठे दलालों ने रिपोर्टर को मरीज समझकर पैसे की डिमांड की।
इतना ही नहीं पैसे लेकर दलालों ने बिना किसी बीमारी के फोन पर रिपोर्टर की ओपीडी पर्ची कटवा दी। उस पर MRI जांच और दवाइयां तक लिखवा ली। महज आधे घंटे में एमआरआई की जांच करवा दी। कैसे ये ‘दलाल गैंग’ आम मरीजों को लूट रहे हैं, पढ़िए- सबसे बड़ा खुलासा…
दलाल-1 : एसएमएस में तो दलालों का कब्जा है, यहां उनके बिना कुछ नहीं होता
एसएमएस अस्पताल के बाहर कई लैब हैं। रिपोर्टर मरीज बनकर एक सादे कागज की पर्ची लेकर बालाजी लैब पहुंचे। लैब के बाहर मेज पर बैठे एक शख्स रविंद्र चौधरी से बात हुई। उसने बताया कि प्राइवेट में एमआरआई करवानी है तो करीब 10 हजार रुपए लगेंगे। उसने ऑफर देते हुए कहा- मेरी सेंटिंग सरकारी लैब में है, वहां कुछ पैसों में ही काम हो जाएगा।
दलाल रविंद्र : क्या बीमारी है?
रिपोर्टर : कमर में दर्द है, प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया था, उसने एमआरआई करवाने के लिए कहा है। SMS में तो लंबी लाइन है, बाहर प्राइवेट में जांच बहुत महंगी है।
दलाल रविंद्र : हॉस्पिटल में तो दलालों का कब्जा है, उनको पैसा दिए बिना तो दो दिन तक लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आना है।
मेरी अंदर सेटिंग है, आप टेंशन मत करो… सिर्फ 3 हजार में आपकी जांच करवा दूंगा।
न डॉक्टर से चेक करवाया, न लाइन में लगे, 30 मिनट में करवा दी MRI
हमने जन आधार कार्ड की फोटोकॉपी दलाल को दी। दलाल ने अपने एक साथी को फोन कर कहा- जन आधार कार्ड की फोटो भेजी है, एक एमआरआई करानी है। इसके बाद शुरू हुई दलालों और अस्पताल के स्टाफ के बीच सांठगांठ का खेल।
हमने न तो ओपीडी की पर्ची कटाई थी, न किसी सरकारी डॉक्टर की ओपीडी में विजिट किया। महज 15 से 20 मिनट बाद एक युवक ओपीडी की पर्ची भी लेकर आया।
उस पर एक डॉक्टर से जांच लिखवाई हुई थी। बाकायदा सील भी लगी हुई थी। युवक हमें बाइक से एसएमएस अस्पताल के पास ही सोनी लैब में लेकर गया।

दलाल के फोन करते ही बाइक पर एक युवक आया।
वहां पर मरीजों की काफी भीड़ लगी थी। बिना किसी वेटिंग के महज 30 मिनट में एमआरआई भी करवा दी। इसकी रिपोर्ट भी दलाल के अड्डे पर ही देने को कहा।
हम वापस बालाजी लैब पहुंचे तो दलाल ने बताया- सोनी लैब के पास एसएमएस के मरीजों के लिए जांच का टेंडर है। दलाल वहां की पर्ची पर सारे काम सेटिंग से कर लेते हैं।

एसएमएस अस्पताल से संबद्ध सोनी लैब में हमारी MRI हुई, लेकिन रिपोर्ट दलालों के ठिकाने पर ही मिली।
पड़ताल : न्यूरोलॉजी विभाग से ओपीडी की पर्ची कटी, मेडिसन विभाग ने जांच लिखी
SMS अस्पताल के भीतर दलाल इसे कैसे अंजाम देते हैं, इसकी तह तक जाना बाकी थी। हमने रिकॉर्ड खंगाला तो पता लगा-
- दलाल ने दोपहर करीब सवा 11 बजे ओपीडी पर्ची (पर्ची नंबर-3094704) काउंटर पर बैठे अपने दलाल से फोन कर कटवाई।
- पर्ची पर दोपहर 11.52 बजे न्यूरोलॉजी के डॉक्टर से परामर्श का समय लिखा गया।
- 12 बजकर 8 मिनट पर एमआरआई का जीरो बिल नंबर 586740941 ऑपरेटर संजूबाबा की आईडी से काटा गया।
- बिल पर MRI कंसल्टेंट वाले कॉलम में किसी राकेश अग्रवाल का नाम लिखा गया।
- पर्ची पर न्यूरोलॉजी डॉक्टर से दवाई भी लिखवाई गई।
- दलाल ने मुफ्त में होने वाली जांच के बदले हमसे 3000 रुपए लिए, जबकि एमआरआई की जीरो रुपए की बिलिंग हुई है। एक घंटे से भी कम समय में ओपीडी की पर्ची और एमआरआई फाइनल हो गया। जबकि रिपोर्टर खुद कहीं नहीं गए।
(नोट : भास्कर के पास ओपीडी की पर्ची और एमआरआई के बिल की कॉपी मौजूद है।)

दलालों ने 3 हजार रुपए लेकर ही रिपोर्ट सौंपी।

एक्सपर्ट के अनुसार MRI जैसी जांच बिना मरीज की कंडिशन को जांचें नहीं लिखी जाती। लेकिन दलाल अपने नेटवर्क के जरिए यह जांच तक लिखवा ली।
SMS अस्पताल के बाहर दलालों के गिरोह को बेनकाब करने के बाद हमें अंदर मौजूद इनके नेटवर्क का पता लगाना था। कई दिनों की पड़ताल में सामने आया अस्पताल में गार्ड से लेकर कई मेडिकल कर्मी कॉन्ट्रैक्ट पर तैनात हैं, जो इसी नेटवर्क का हिस्सा बने हुए हैं।
दलाल 2 : यहां पैसे से सब काम होता है, तुम सही जगह आए हो
एसएमएस अस्पताल में रिपोर्टर मरीज बनकर दूसरी एमआरआई लैब नंबर- 12 में पहुंचे। जांच करवाने के लिए मरीजों की लंबी कतारें लगी थीं। मरीजों को रात 11 बजे से लेकर 2 बजे तक का टाइम दिया रहा था। लंबी भीड़ देखते हुए भास्कर रिपोर्टर लैब के बाहर ही पार्किंग में तैनात एक गार्ड के पास खड़े हुए। उससे बात शुरू हुई…
रिपोर्टर : सर, एमआरआई करवानी थी, कैसे होगी हमें कुछ पता नहीं है।
गार्ड : कौन सी एमआरआई है, डॉक्टर की पर्ची है क्या?
रिपोर्टर : डॉक्टर की पर्ची नहीं है।
गार्ड : डॉक्टर की पर्ची पर लिखा कर लाओ। एमआरआई की अलग पर्ची होती है। जिस पर अलग मोहर लगती है।

रिपोर्टर : वो कैसे…हमारी जांच करवा दो कीमत दे देंगे।
गार्ड : सब करवा दूंगा, लेकिन यह ध्यान रखना मेरी नौकरी नहीं जानी चाहिए।
रिपोर्टर : हमारा काम करवा दो, दो दिन से भटक रहे हैं।
गार्ड : टेंशन मत लो, अब तुम सही जगह आए हो। सुबह 8 बजे आ जाना मैं तुम्हारी सारी पर्चियां बना दूंगा, जो भी पैसे लगेंगे वो उसी समय दे देना। तुम तो आराम से बैठ जाना एक घंटे में जांच करवा दूंगा।

गार्ड ने दावा किया कि वो महज 1 घंटे में MRI करवा देंगे।
दलाल 3 : चाय की दुकान वाला भी दलाल निकला
तीसरे दिन की पड़ताल में हम एसएमएस अस्पताल के कमरा नंबर- 60 में संचालित एमआरआई लैब में गए। लाइन में खड़े मरीजों से पता चला कि नंबर आने में 10 से 12 घंटे लग रहे हैं। लंबी लाइन देखकर हम सेंटर के बाहर बनी चाय की दुकान पर बैठे…
चायवाला : भईया एमआरआई करवाने आए हो क्या?
रिपोर्टर : हां, लेकिन यहां तो 10-12 घंटों बाद नंबर आने का बोल रहे हैं।
चायवाला : कौनसे डॉक्टर को दिखाया था?
रिपोर्टर : प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर को दिखाया था, उसने एमआरआई जांच करवाने के लिए कहा। सरकारी अस्पताल में फ्री होती है इसलिए यहां आ गए।
चायवाला : प्राइवेट डॉक्टर की पर्ची से नहीं होगी…ओपीडी जाओ फिर सरकारी डॉक्टर की पर्ची लेकर लाइन में लगना।
रिपोर्टर : वो तो नहीं है, हमें तो आज ही जांच करवानी थी।
चायवाला : अंदर कोई नहीं मिला क्या….पहले अंदर बात कर लो हो जाएगी।

दलाल ने एमआरआई लैब के स्टाफ से करवाई बात
बात करने वाले ने बीमारी और जांच के बारे में पूछा और 4 हजार रुपए की डिमांड की। उसने दावा किया कि पर्ची कटवाने से लेकर एमआरआई कराने की सारी जिम्मेदारी उसकी है। लाइन में भी नहीं लगना होगा। लैब स्टाफ ने बताया कि रात को 9 बजे एमआरआई सेंटर पहुंच जाना, तब मैं ड्यूटी पर रहूंगा।

भास्कर टीम ने चायवाले से नंबर लेकर लैब में काम करने वाले शख्स से फोन पर बातचीत की। वह 4 हजार रुपए में MRI करने को तैयार था। प्राइवेट लैब में यह जांच करीब 10 हजार रुपए में होती है।
25 हजार तक की MRI फ्री, लेकिन दूसरे-तीसरे दिन आता है नंबर
राजस्थान सरकार ने सरकारी अस्पतालों में एमआरआई, एक्स रे, सोनोग्राफी जैसी हर महंगी से महंगी जांच आम लोगों के लिए फ्री कर रखी हैं। इनमें कई लेवल की MRI जांच तो 25 हजार रुपए की है। लेकिन भारी भीड़ के कारण आम मरीजों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है।

भास्कर टीम उसी रात MRI लैब के बाहर पहुंची तो सुबह से आए मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
ओपीडी की पर्ची कटवाने से लेकर, ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने और उसके बाद जांच की पर्ची कटवाने में ही कई बार 4-8 घंटे लग जाते हैं। इसके बाद MRI करवाने के दौरान भी कम से कम 12 घंटे की वेटिंग मिलती है। लैब के बाहर मरीजों को 2 दिन तक खड़े रहना पड़ता है। कई मरीजों ने तो बताया कि उनका तीसरे दिन जाकर नंबर आया।
पर्ची कटवाने से लेकर जांच कराने तक, दलालों का कब्जा
प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल एसएमएस में इलाज से लेकर हर प्रकार की जांच-दवाई फ्री है। यही कारण है कि हर दिन 8 से 10 हजार मरीज अस्पताल में इलाज कराने आते हैं। लेकिन अस्पताल में डॉक्टर से लेकर मेडिकल जांचों की लैब पर दलालों ने कब्जा कर रखा है। लंबी कतारों से बचना है और तुरंत डॉक्टर को दिखाना है तो यह दलाल आपसे पैसे लेकर कुछ ही मिनटों में आपकी एमआरआई-सिटी स्केन जैसी जांच भी करवा देंगे।
दलालों की सेंटिंग ओपीडी में पर्ची कटाने से लेकर डॉक्टर की पर्ची से एमआरआई सेंटर तक होती है। यह दलाल आपको हॉस्पिटल के बाहर मेडिकल दुकानों पर, एमआरआई लेब से लेकर ओपीडी के पास खड़े दिख जाएंगे।

एसएमएस अस्पताल परिसर में मौजूद दोनों एमआरआई लैब का संचालन सोनी लैब करती है।
एसएमएस में सोनी के दो एमआरआई सेंटर, एक बाहर
एसएमएस अस्पताल में सोनी अस्पताल से टेंडर पर एमआरआई की दो मशीनें लगी हुई हैं। ये एमआरआई कमरा नंबर 60 और 12 में संचालित हैं। एसएमएस अस्पताल से ही कॉन्ट्रैक्ट पर सोनी का तीसरा एमआरआई सेंटर परिसर से बाहर भी संचालित है।
एसएमएस में अधिक मरीज होने पर मरीज यहां से भी एमआरआई करवा सकते हैं। कॉन्ट्रैक्ट के हिसाब से एसएमएस अस्पताल की पर्ची पर यहां पर भी फ्री में ही जांच की जाती है। नियम है कि एक मरीज को 24 घंटे से अधिक का समय नहीं दिया जाता है। एसएमएस अस्पताल में डेली औसतन 250 के आसपास एमआरआई जांच होती हैं। वहीं, बाहर से करीब 20 से 30 जांच की जाती हैं।
जिम्मेदार बोले- शिकायत मिलते ही करते हैं कार्रवाई अस्पताल में जारी एजेंटों के खेल को लेकर हमने एसएमएस के अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी से बात करने की कोशिश की। उन्होंने इस बारे में मीडिया प्रभारी डॉक्टर प्रदीप शर्मा से बात करने के कहा।

सीधी बातचीत : डॉ. प्रदीप शर्मा, मीडिया प्रभारी व अतिरिक्त अधीक्षक एसएमएस
सवाल : एसएमएस हॉस्पिटल में कई एजेंट आम लोगों के लिए फ्री में होने वाली एमआरआई महज एक घंटे में करवाने का झांसा देकर पैसे ले रहे है? जवाब : हां, ऐसे केस हमारे पास पहले भी आए थे। हमने ऐसे एजेंट के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। एसएमएस हॉस्पिटल में पीपीटी मॉडल पर एमआरआई का जिम्मा सोनी लैब को दे रखा है। इसकी निगरानी के लिए रेडियोलॉजी के नोडल ऑफिसर भी लगा रखे हैं।
सवाल : एजेंट मरीज के घर बैठे ओपीडी की पर्ची, डॉक्टर की पर्ची कटवाकर एमआरआई कैसे करवा देते हैं? जवाब : ओपीडी की पर्ची जन आधार कार्ड से कटती है। वहां फेस रेकग्नाइज का कोई तरीका नहीं होता है। एजेंट किसी परिचित या रेफरेंस का हवाला देकर पर्ची कटवा लेते हैं। इसे रोकने के लिए हमने हर डिपार्टमेंट में नोडल ऑफिसर लगा रखे हैं।
सवाल : फ्री में होने वाली एमआरआई से एजेंट पैसे कमा रहे हैं, इसे रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे है? जवाब : इसके लिए मॉनिटरिंग और निगरानी रखते हैं। ऐसे एजेंट के खिलाफ शिकायत मिलते ही कार्रवाई की जाती है।
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