रेलवे और IRCTC के अनुसार, बीते कुछ समय से धार्मिक स्थलों के रूट पर ट्रेनों में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. खासतौर पर पूर्वी भारत के मंदिरों और धार्मिक स्थलों को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी रुचि देखी जा रही है. इसी को ध्यान में रखते हुए यह विशेष रेलयात्रा तैयार की गई है, ताकि यात्रियों को एक ही यात्रा में कई प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर मिल सके.
दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा का पूरा रूट
इस विशेष रेलयात्रा के तहत यात्रियों को भारत के पूर्वी भाग के कई बड़े और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों तक ले जाया जाएगा. यात्रा में वाराणसी, कोलकाता, गंगासागर, पुरी, भुवनेश्वर, कोणार्क, चिलिका और बैद्यनाथ धाम जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं. ये सभी स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं. रेलवे का कहना है कि इस सर्किट को इस तरह तैयार किया गया है कि यात्रियों को लगातार सफर की थकान कम महसूस हो और हर स्थान पर पर्याप्त समय मिल सके.
IRCTC द्वारा आयोजित यह यात्रा कुल 10 दिनों की होगी. जानकारी के अनुसार, यह विशेष ट्रेन 9 मार्च को दिल्ली से रवाना होगी और पूर्वी भारत के विभिन्न धार्मिक स्थलों का भ्रमण कराते हुए 18 मार्च को वापस दिल्ली लौटेगी. इस दौरान यात्रियों के ठहरने, भोजन और स्थानीय दर्शन व्यवस्था का भी प्रबंधन किया जाएगा. रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह रेल आधारित पर्यटन सर्किट है, जिसमें यात्रियों को अलग-अलग शहरों में ट्रांसफर की परेशानी नहीं होगी.
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश
रेलवे और IRCTC का मानना है कि इस तरह की यात्राएं न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक होती हैं, बल्कि इससे धार्मिक पर्यटन को भी मजबूती मिलती है. पूर्वी भारत के मंदिरों और तीर्थ स्थलों तक पहुंच को आसान बनाना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य बताया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, पहले भी धार्मिक सर्किट ट्रेनों को अच्छा रिस्पॉन्स मिला है और इसी अनुभव के आधार पर इस नए सर्किट की योजना बनाई गई है.
यात्रियों में बढ़ता रुझान
रेलवे से जुड़े सूत्रों का कहना है कि धार्मिक स्थलों के लिए विशेष ट्रेनों में बुकिंग का ट्रेंड लगातार बढ़ रहा है. खासकर बुजुर्ग यात्रियों और पारिवारिक यात्राओं में इस तरह के पैकेज लोकप्रिय हो रहे हैं. एक ही टिकट में यात्रा, ठहराव और दर्शन की सुविधा मिलने से यात्रियों को अलग-अलग इंतजाम करने की जरूरत नहीं पड़ती. IRCTC और रेलवे की यह पहल आने वाले समय में पूर्वी भारत के धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दे सकती है. फिलहाल इस दिव्य पूर्वी मंदिर यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं और रेलयात्रियों के बीच खासा उत्साह देखा जा रहा है.
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