Jaipur News : जयपुर की नन्ही स्क्वैश खिलाड़ी दिव्यांशी जैन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन किया है. एडिनबर्ग में आयोजित स्कॉटिश ओपन स्क्वैश में अंडर-13 गर्ल्स कैटेगरी का खिताब जीतकर उन्होंने महज एक महीने में दूसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया है.
जयपुर के नन्हे खिलाड़ी दुनियाभर में अपने खेल से भारत का नाम रौशन कर रहे हैं, हर खेल में जयपुर के खिलाड़ी विदेशी धरती पर जीत का तिरंगा लहरा रहे हैं ऐसे ही जयपुर की स्क्वैश खिलाड़ी दिव्यांशी जैन जिसने हालही में एडिनबर्ग में आयोजित स्कॉटिश ओपन स्क्वैश की अंडर-13 गर्ल्स कैटेगरी में खिताब जीता, एक महिने में ही दिव्यांशी ने अपना दूसरा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता है. स्कॉटिश ओपन स्क्वैश प्रतियोगिता के फ़ाइनल राउंड में दिव्यांशी जैन ने भारत की ही शनाया परसरामपुरिया को हराकर यह खिताब अपने नाम किया.

एडिनबर्ग में आयोजित स्कॉटिश ओपन स्क्वैश की अंडर-13 में दिव्यांशी जैन ने पहले राउंड से आखरी राउंड तक बढ़त बनाकर खेलते हुए उन्होंने यह खिताब जीता, दिव्यांशी ने इस प्रतियोगिता के पहले राउंड में स्कॉटलैंड की जेसिका क्रेग को 11-3, 11-5, 11-2 से हराया और फिर दूसरे राउंड में इंग्लैंड की सारा इब्राहिम को 11-1, 11-3, 11-6 से पराजित किया. इसके बाद तीसरा राउंड में कतर की जोय मकारयुस से 11-3, 11-2, 11-4 से जीती दिव्यांशी और चौथा राउंड मेजबान स्कॉटलैंड की टालिन वेडायर को 11-0, 11-2, 11-0 हराया. आखरी और फाइनल राउंड में उन्होंने भारत की शनाया परसरामपुरिया को 11-5, 11-9, 11-5 से हराकर खिताब अपने नाम किया.

दिव्यांशी जैन जयपुर की स्क्वैश खिलाड़ी हैं, जिन्हें 8 साल की उम्र में खेलना शुरू किया था. कोविड के समय 2021 में उन्होंने अपने खेल की शुरुआत राजस्थान स्क्वैश अकादमी में से की थी. यही से खेलते हुए उन्होंने जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अब तक 25 ट्रॉफी जीती हैं. दिव्यांशी वर्तमान में सेंट जेवियर्स स्कूल की 7वीं क्लास की स्टूडेंट हैं और उनकी उम्र मात्र 11 साल हैं। आने वाले दिनों में दिव्यांशी कई देशों की स्क्वैश प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी.
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2021 से स्क्वैश खेलते हुए उन्होंने कई टूर्नामेंट में खिताब जीते हैं इनमें नॉर्दर्न इंडियन स्लैम, सर्दन स्लैम, वेस्टर्न स्लैम ईस्टर्न स्लैम, इंडियन जूनियर ओपन, स्कॉटिश जूनियर ओपन, सब जूनियर नेशनल चैंपियनशिप, राजस्थान स्टेट क्लोज चैंपियनशिप में भी विजेता रही हैं. इसके अलावा दिव्यांशी ने दक्षिण कोरिया में एशियन जूनियर इंडिविजुअल स्क्वैश चैंपियनशिप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं. इसी महिने में दिव्यांशी ने कुआलालंपुर ओपन में भी खिताब जीता था. अपने बेहतरीन खेल से दिव्यांशी ने अपने आप को इतनी कम उम्र में एक मजबूत जूनियर स्क्वैश खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया है जो राजस्थान के लिए भी गर्व की बात है.

दिव्यांशी जैन ने कुछ ही वर्षों में स्क्वैश खेलते हुए कई खिताब जीते बल्कि वह अंडर-11 की कैटेगरी में राजस्थान, भारत और एशिया की नंबर-1 स्क्वैश खिलाड़ी बन चुकी हैं. और अंडर-13 कैटेगरी में देश की नम्बर एक स्क्वैश खिलाड़ी है. इसलिए राजस्थान में जूनियर कैटेगरी में आयोजित होनी वाली प्रतियोगिताओं और भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें पहली वरियता दी जाती है. जिला स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक दिव्यांशी जैन जूनियर कैटेगरी में राजस्थान की नंबर वन खिलाड़ी हैं.

अगर बात करें दिव्यांशी जैन के स्क्वैश खेल सफर की तो उनके सफर की असली शुरुआत जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम से हुई जहां उनकी मां डॉ. नेहा नरेंद्र जैन ने उनका एडमिशन राजस्थान स्क्वैश एकेडमी में करवाया जहां खासतौर पर वह भारत की पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, वर्तमान भारतीय टीम कोच और स्कवैश फेडरेशन ऑफ इंडिया की वाइस प्रेसीडेंट सुरभि मिश्रा से दिव्यांशी ने कोचिंग ले यही से उनके बेहतरीन खिलाड़ी बनने का सफर शुरू हुआ.

अगर बात करें स्क्वैश खेल की तो यह खेल एक रैकेट से खेले जाने वाला खेल है जो अन्य खेलों के मुकाबले थोड़ा अलग है जिसे चार दीवारों वाले कोर्ट में दो खिलाड़ियों या चार खिलाड़ियों के द्वारा खेला जाता है, जिसमें वे एक छोटी, खोखली रबर की गेंद को बारी-बारी से सामने वाली दीवार पर मारते हैं, स्क्वैश खेल का खेल खासतौर पर तेज़-तर्रार और फुर्ती का खेल है. जिसे अक्सर ‘टर्बोचार्ज्ड शतरंज’ भी कहा जाता है. इस खेल में दीवार पर टिन और आउटलाइन होती हैं. जिसमें बारी-बारी से गेंद को सामने की दीवार पर मारते हैं. आमतौर पर इस खेल 11 अंकों तक खेला जाता है, और दो अंकों की बढ़त से जीत होती है इसलिए इस खेल की सुविधा शहरों में होती है अगर कोई जयपुर में इस खेल को खेलना और सिखाना चाहता हैं तो वह राजस्थान स्क्वैश अकादमी और अन्य प्राइवेट क्लबों से खेल सकते हैं.
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